सादर अभिवादन
शिक्षक दिवस
नाम लेते ही याद आता है
भारतरत्न सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति थे
हमारे देश के द्वितीय किंतु अद्वितीय राष्ट्रपति डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिन
5 सितम्बर को प्रतिवर्ष 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा
श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है।
सब बच्चे प्रसन्नचित होकर
स्कूल को सजाते हैं..आपस में चंदा करके
गुरुजी को लिए फूलों का गुलदस्ता लाते हैं
नमन करती हूँ समस्त गुरुजनों को
रचनाएँ देखिए.....

कुम्हलाई आँखे
ताक रही थी,
रास्ता स्कूल का
नाप रही थी।
रंग-बिरंगे चेहरे पे
उदासी बाहर से
झांक रही थी।

बेचारे बख्शी जी जो पिछले दो सालों से मिसेज माथुर के साथ से सह प्राध्यापक के रूप में काम कर रहे थे, नियत और धीरे स्वर में बस इतना ही कह सके मैडम, आप हमेशा ही १० बजे का समय ही मीटिंग के लिये रखती हैं और कल शाम मैं आपसे मीटिंग का समय पूंछना भूल गया था, आगे से पूंछ लिया करूंगा।
मीटिंग मे कुछ मुद्दों पर बात चल ही रही थी कि चपरासी प्रधानाचार्या माथुर के कक्ष में सभी के लिये चाय ले कर आ गया।
हर रात हम अपने घर जाते हैं
अनजाने ही
और भोर में पोषित होकर लौटते हैं
जाहिर है घर पर कोई है
यदि रात सो न सका कोई
दोनों उनके लिए एक हैं,
क्या पुण्य, क्या पाप।
वक्त पड़े तो सदा बताया,
गदहे को भी बाप।
खूब कमाई की बंदे ने,
मत पूछो इस साल की।
जो नेता हैं बड़े काम के,
ढोते उनकी पालकी।।
कसे रहने के लिए
तने रहने के लिए
आवरण बने रहने के लिए
मनुष्य को सहेजने के लिए
मनुष्यत्व की आशा में
झुर्रियां पड़ने तक
घिस कर पतली होने तक
ओज़ोन परत की तरह।
...
इति शुभम्
...
इति शुभम्



