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रविवार, 1 अगस्त 2021

3107 ..बिखरे बिखरे शब्द है भाव खोखले हो गये रीत जगत की यही...

सादर अभिवादन
सच में अभिवादन
अगस्त की पहली प्रस्तुति जो है
अगस्त के बारे में
भारत यानी इण्डिया
इण्डिया का मतलब जानते हैं न आप
अंग्रेजा का दिया हुआ नाम है
INDIA का असली मतलब
INDEPAENDET NATION DECLARED IN AUGUST

और पाकिस्तान को कोई नाम नहीं दिया
मतलब पाकिस्तान अभी भी स्वतंत्र नहीं है

बातें बाद में पहले देखें रचनाएँ...

अपने देश में भी एक ऐसा और विचित्र वस्तु का संग्रहालय है जिसके बारे में अधिकांश देशवासियों को पता ही नहीं है ! जानकारी है भी तो बहुत कम लोगों को ! वह भी आधी-अधूरी सी ! हालांकि यह  हर एक इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी  का अहम  हिस्सा है !  वह है शौचालय, जिसके बिना  किसी भी  इंसान का  दिन  सुचारू रूप  से शुरू नहीं हो पाता ! इंसान  को अपने  सिर पर ‘मैला’ ढोने  के अभिशाप  से मुक्ति  दिलवाने का  संकल्प ले कर  देश में सुलभ शौचालयों की श्रृंखला बनाने वाले डॉ. विंधेश्वरी पाठक ने  अपने एन.जी.ओ. द्वारा उन्हीं शौचालयों  का एक म्यूजियम देश की राजधानी दिल्ली में बना डाला है !


उड़ सको, तो उड़ जाओ पिंजरा बंद कभी न था,
आँख के पैमाइश से न देखो आसमां का रंग,
दिल की अथाह गहराइयों में, कोई तुम सा हसीं न था।


यूँ, कब तलक, तरसाए, ये तिश्नगी,
मार ही डाले, न ये, आवारगी,
अगन सी है, इन सदाओं में,
चलो चलें कहीं.......


पाँच वर्ष तक दर्शन दुर्लभ थे जिन देवों के,
वे औचक दर्शनार्थ घरों मे भटकने लगे हैं।
 
फ्री से पहले ही कर्म शक्ति नेस्तानाबूद है,
और फ्री से रहा-सहा जमीजोद होने लगे हैं।


बज रहे नगाड़े, मिल रही बधाइयां
शाखों पर आगई हरी हरी पत्तियां
नव कोपलों से  सुसज्जित शाख
भूल गई विरह वेदना....
कौन सुनेगा दर्द की कहानियां।।

बिखरे बिखरे शब्द है
भाव  खोखले हो गये
 रीत जगत की यही...
आने वाले कि उमंग में
भूल गए दर्द की कहानियां...
.....
कल मिलिएगा बड़ी दीदी से
सादर


 

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