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मंगलवार, 15 मार्च 2022

3333...दिलो -दिमाग खुशियों से लबरेज होगा , शुरुआत तो करो



जय मां हाटेशवरी......
सर्वप्रथम क्षमा मांगता हूं.....
इतने समय तक अनुपस्थित रहा.....
कुछ तकनीकी समस्या.....
कुछ अधिक व्यस्तता.....
पर आज प्रस्तुती बनाते हुए.....
बहुत प्रसन्न हूं......
अब पढ़िये आज के लिये मेरी पसंद.....
पहली रचना आयातित



देखते  ही बीत  चले
दिन,  महीने  , साल  यूँ  ही  !
ना   फीके पडे रंग चाहत  के
रहा  तेरा  ख्याल  यूँ  ही  !
प्रगाढ़  थी  लगन  मन की
कहाँ  बात  थी अधिकार   की  ?
सुनी समय  ने  बस   कहानी
तेरे  मेरे  प्यार  की  !!



अस्पताल से बाहर आकर जब सब घर जाने के लिए गाड़ी में बैठने लगे तो सलिल वर्तिका के मन को टटोलने के विचार से उससे बोले – “ बेटी ! अगर तुम्हें अपने असली माता पिता के बारे में जानने की उत्सुकता हो तो मैं प्रतीक से बात करके देखूं | क्योंकि वह उसी क्षेत्र का रहने वाला है , जहां तुम अपने बाबा को कूड़े में पडी मिली थीं |”  
“ पापा !” वर्तिका गाडी स्टार्ट करते हुए बोली – “ मैं उन माता पिता के विषय में जानकर क्या करूंगी जिन्होंने मुझे जन्म लेते ही कुत्तों को नोच नोच कर खाने के लिए कूड़े में फैंक दिया | हमारे देश में तो मृत्यु दण्ड के क्रूर से क्रूर अपराधी को भी न्यायालय यातनाएं देने की अनुमति नहीं देता | पर मेरे विषय में तो यह तक नहीं सोचा गया कि मैं कितनी छोटी हूँ | जब तीन तीन चार चार कुत्ते अपने तेज बड़े डांतों से मुझे नौचेंगे तो मैं कितना चीखूंगी , कैसे छटपटाऊँगी तडपूंगी | जब कोई कुत्ता मेरी टांग खीचेगा , कोई हाथ ,कोई मेरा पेट जबड़े में भरेगा और कोई मेरा मुह - तो मुझ पर क्या बीतेगी | अगर बाबा उजाला होने से पहले मुझे न देखते और अपनी कुटिया पर मुझे नहीं लाते तो यही सब तो मेरे साथ होता | पापा मुझे जीवन देने वाले तो मेरे बाबा हैं और मेरा पालन करने वाले मम्मी पापा आप दोनों हैं | मैं किसी और को कुछ नहीं जानती और न जानना चाहती हूँ |      




पर हूँ वहीं, अब भी, लिए वही अनुभूतियां, 
पल सारे, अब भी, कंपित हैं जहां, सीमाओं से परे, 
समय जिधर  था, न जाने, कौन यहां आया था! गहन अनुभूतियों नें, .
हौले से सहलाया था, न जाने, कौन यहां आया था!




 हृदय का मत यूं संताप बढा 
बन जरा सत्य में लिखा पढा  
अब झांक जरा अंतर्मन मे 
 औरों के माथ ना दोष चढा




लोगों का क्या है ?
उनके तंजों की परवाह छोड़ो 
अब अपने जी की भी कुछ करो 
 जीने का नज़रिया बदलेगा ,
दिलो -दिमाग खुशियों से लबरेज होगा ,
शुरुआत तो करो 




जब आमंत्रित प्रासिद्ध वायलिन वादक मंच पर आ गए तब ऋषभ ने उनके  चरणों में झुककर प्रणाम किया। उन्होंने उसे हृदय से लगा लिया। अपने घुटनों पर बैठे हुए और उसको हॄदय से लगाये हुए ही उन्होंने माइक पर कुछ कहा  था। लेकिन उसे तीन ही शब्द याद रहे। "आज ऋषभ ने 'दिल से बजाया' है।" हॉल में तालियाँ बजती रहीं। अब उसे गुरुजी के सूत्र - वाक्य "दिल से बजाना" का अर्थ समझ में आ गया था। 

 आज बस यहीं तक...... 
अब मिलते रहेंगे..... 
धन्यवाद....

बुधवार, 19 मई 2021

3033 ..क्‍यों कि‍ इनके द‍िमाग और कुप्रवृत्‍त‍ियों का ऑड‍िट तो नहीं कराया जा सकता।

सादर वन्दे
कई दिन फंसी पड़ी रही
विशाखापत्तनम मे
दो विद्यार्थी बीमार हो गए थे
वे ठीक हुए तो आई उन्हें लेकर
उन बच्चों का परिवार भी था
कोचिंग से तौबा कर ली अब...
सोचती हूँ जो हो रहा है क्या वो सच है
भगवान करे वह झूठ हो....
रचनाएँ..


विदेशों को वैक्‍सीन मुहैया कराने का सच
निश्‍च‍ित रूप से किसी अंधे व्‍यक्‍त‍ि को तो रास्‍ता दिखाया जा सकता है परंतु जो देखते हुए अंधा बनने का नाट‍क करे, उसे कौन दृष्‍ट‍ि दे। वैक्‍सीन को दूसरे देशों में भेजने पर किए जा रहे कांग्रेस व आप के दुष्‍प्रचार के पीछे भी यही बात है जबकि हकीकत यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के समझौते एवं कच्चे माल के एवज में वाणिज्यिक करार के तहत वैक्सीन देने की “बाध्यता” है।

भारत ने 7 पड़ोसी देशों बंगलादेश, नेपाल, श्रीलंका आदि को 78 लाख 50 हजार वैक्सीन अनुदान के तहत उपलब्ध कराया। इन आंख वाले अंधों को कौन समझाए क‍ि 2 लाख डोज संयुक्त राष्ट्र संघ के उस शांति बल के लिए सहायता स्वरूप दी गईं जिसमें 6600 तो भारतीय सैनिक ही हैं, अन्य देशों को दिए गए कुल वैक्सीन का यह करीब 16% है।

विदेशों को दिए गए 6 करोड़ 63 लाख वैक्सीन के डोज का करीब 84 प्रतिशत डोज वाणिज्यिक समझौते व लाइसेंसिंग करार के तहत उन देशों को दिया गया जिनसे हमें वैक्सीन तैयार करने के लिए कच्चा माल व लाइसेंस मिला है।

यूके को बड़ी मात्रा में वैक्सीन इसलिए देनी पड़ी क्योंकि सीरम इंस्टिट्यूट जिस कोविशिल्ड वैक्सीन का निर्माण कर रही है उसका लाइसेंस यूके के ‘ऑक्सफोर्ड एक्स्ट्रा जेनिका’ से प्राप्त हुआ है और “लाइसेंसिंग करार” के तहत उसे वैक्सीन का डोज देना जरूरी है।

इसके अलावा वाणिज्यिक समझौते के तहत सऊदी अरब को 12.5 प्रतिशत वैक्सीन देनी है क्योंकि जहां उससे पेट्रोलियम का आयात होता है वहीं बड़ी संख्या में वहां रह रहे भारतीयों को दो डोज मुफ्त वैक्सीन देने का उसने भारत से समझौता किया है।

इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन से हुए एक समझौते के तहत कुल निर्यात का 30 प्रतिशत वैक्सीन ‘को-वैक्स फैसिलिटी’ को दिया जाना है। 


काश कुछ ऐसा हो जाए
रात में अपार शान्ति रहे
चाहे दिन में व्यस्त  रहूँ
पर रात्रि को विश्राम करूं |  
आज की इस दुनिया में
है इतनी व्यस्तता कि
दिन दिन नहीं दिखता

अब नहीं है
सच और झूठ के बीच महीन रेखा
अब है चौड़ी खाई
जिसे नहीं फलांग सकेंगे हम
हमारे पांव हो चुके हैं बौने
हाथ कंधों से ऊपर उठते ही नहीं
गरदन झुक चुकी है
और दिमाग़ हो चला है विचारशून्य


हो वैरी का जैविक वार या प्रकृति हुई ख़फ़ा
कि तुले महाप्रलय पे धर्मराज कर रहे ज़फ़ा
विस्मित हैं सांसों के अकस्मात् थम जाने से
निरूपाय बेबस लोग उचित उपचार पाने से ।

जो किये कल के लिये संचय न काम आया
कांपते स्वजन भी छूने से ऐसी रूग्ण काया
कांधा भी ना मुनासिब बेसहारा सी मृत देह
थरथराती रूह औषधालयों पर भी है संदेह ।


कि चलो क्षितिज पार
मंज़िल है वहाँ
जहाँ दूर-दूर  सागर से
आसमां मिलता है।।

अब क्या  खौफ़... किसी का
हमने मौत से लड़कर
जीवन जीतना सीखा है।।

आशा महासाध्वी कदाचित् मां न मुञ्चति।


इति शुभम्
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