सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
मन का विश्वास लिखूँ,
यौवन का उल्लास लिखूँ,
बरसात की रिमझिम चुनूँ,
या पपीहे की प्यास लिखूँ ,
>>>>>>>>>>>>>>>>>> नैनी ग्रोवर
मम्मी-दादी से भी जता दो....
और एक बात मुझे बता दो....
जब लड़की-लड़का एक-समान....
और दोनो से ही है जग की शान....
फिर कन्या भूर्ण हत्यारों को आती क्यों शर्म नहीं?
उसकी आवाज़ को न सुनने वाले
जात ज़रूर समझते हैं
रंग से पहचानते हैं
धर्म के राज्य में
उसे जूतियों में रखते हैं
इन जूतियों में
पुश्तों के बेगार की चमक है
सडकों पर चलती है गाड़ी, शोर शराबा करे सवारी
कहीं अगर कोई दब जाए, नाही सुनते उनका क्रंदन
मानव जीवन सबसे सस्ता, क़ानून का अब हाल है खस्ता
उपवन में सजती है क्यारी, माली देखे हो प्रसन्न मन
जो बिगड़ गयी कुछ बात, उसकी याद लिखता हूँ..
कभी-कभी तुम संग बिते पलों का हिसाब लिखता हूँ..
तो कभी तुम बिन जागती रातों का खयाल लिखता हूँ..
फिर बिन तुम्हारें खाली पलों का मलाल लिखता हूँ.
यह प्रक्रिया काफ़ी देर से चल रही थी इसलिए यात्रियों का भी
ध्यान केंद्रित किए हुए थी, परेशान होकर
उस आदमी ने बाहर झांका और बस से नीचे उतर गया,
किसी तरह से वाहनों कूदते-फांदते थोड़ी देर बाद दूध लेकर लौटा ।
न जाने किस गुनाह ने, बनाया फिर गुनहगार मुझे,
मेरी चाहत फिर बे-वफ़ा हो गयी..!!
फिर दूर हो गयीं सब चाहतें मुझसे,
उनकी बातें भी अब जुदा हो गयीं
स्कूली शिक्षा के दौरान कई कक्षाओं तक परीक्षाओं में एक निबंध अक्सर लिखने के लिए कहा जाता था, जिसका शीर्षक था विज्ञान, वरदान या अभिशाप । उस समय की अपनी समझ के अनुसार पढक़र, रटकर निबंध लिख लिया करता था। अब जब गुम होती बेटियों और उसके कारणों के बारे में धरातल पर तस्वीर देखी, तब उस निबंध का मतलब और महत्व समझ में आ रहा है।
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फिर मिलेंगे ..... तब तक के लिए
आखरी सलाम
विभा रानी श्रीवास्तव