सादर अभिवादन...
किसान आन्दोलन जारी आहे
आज भारत बंद है
हर आम व खास के लिए
लंगर है न...
कोई भी भूखा नहीं रहेगा
भारत में किसान है न
हर किसी का पेट भरेगा
सुनी हूँ लंगर में पीजा भी है
कहां तक सच है पता नहीं
अखबार देखते रहिए
फिलहाल रचनाएँ देखिए.....
सुनी हूँ लंगर में पीजा भी है
कहां तक सच है पता नहीं
अखबार देखते रहिए
फिलहाल रचनाएँ देखिए.....
ये जो मौजूद है इसी में कहीं
इक ख़ला है तुझे नहीं मालूम
तब कहाँ था वो अब कहाँ पर है
पूजता है ! तुझे नहीं मालूम
इश्क़ खुलता नहीं किसी पर भी
दायरा है ! तुझे नहीं मालूम
रोते-रोते ये क्या हुआ तुझको
हँस पड़ा है ! तुझे नहीं मालूम
उस दिन मन निकालकर
कोरे काग़ज़ पर
बड़ी सुघड़ता से रख दिया था मैंने।
सोचा था किसी दृष्टि पड़ेगी तो
अवश्य ही मेरे मन की ओर
आकर्षित हो वह भद्र
उसे यथोपचार देकर
अपने स्नेह धर्म का
निर्वहन करेगा।
जंग अभी, है यह जारी!
विपदाओं पर, है यह मानव भारी,
इक नए कूच की, है तैयारी,
अब, ब्रम्हांड विजय की है बारी,
ठहरा है कब, मानव,
जीवट बड़ा!
हर बदलाव
मुझमें ही चाहते हो
ख़ुद से कभी पहल नहीं करते
छोड़ देते हो
कठिन-सा सवाल समझकर
तुम मुझे कभी हल नहीं करते।
अपने बच्चे ने की तो नासमझी
एक ही धूल-मिट्टी
अगर ...
किसान के हाथों लगे तो माटी
और...
शहरी परंपरा में
धूल गंदगी कहलाती है।
....
बस
कल मिलेगी पम्मी सखी
सादर
बस
कल मिलेगी पम्मी सखी
सादर




