सादर अभिवादन
सोमवार शुभ हो
सीधे चलते हैं रचनाओं की ओर..
सोमवार शुभ हो
सीधे चलते हैं रचनाओं की ओर..
आज की इस भागमभाग में
दुनिया के समंदर में
वेदनाओं के भंवर में
संवेदनाओं के लिए वक्त कहां
आज संवेदना उठती है मन में
बसती है दिल में
और दिमाग में सिमट जाती है
सड़क पर भीड़ थी,
कोलाहल था, हलचल थी
आँखों के सामने
चलती बस से कूद कर
सड़क पर गिरी घायल लड़की की
तड़पती हुई देह थी !
यह दम तोड़ती लड़की
कंकर-कंकर में है शंकर
अणु-अणु में बसते महाविष्णु,
ब्रह्म व्याप्त ब्राह्मी सृष्टि में
क्यों भयभीत कर रहा विषाणु !
देखा है कई बार प्रेम से चलकर ।
जिया भी प्रेम के संग,
यहाँ वहाँ इधर उधर ।।
आसमानों में । बाग़ानों में ।।
झील के किनारों पे ।चाँद और सितारों पे ।।



