सादर नमस्कार
आज पाँच लिंकों का आनन्द में
हमारी आमद दर्ज हो रही है
एक लम्बे अंतराल के बाद
श्रीमति श्वेता सिन्हा की पुरानी रचनाओं के साथ

मन
परिस्थितियों की
उद्विग्नता से
उद्वेलित,
विचलित होकर
अपने अस्तित्व की
सार्थकता टोहता,
मोह की मरीचिका को
पाने की लालसा में
टकराता है
रेतीली भूमि की सतह से,

आहट पाकर गर्मी की
एक पेड़ हौले-से शरमाता है
गरम हवा संग अंगड़ाई ले
पत्तियों का दुपट्टा गिराता है
पत्रविहीन शाखों ने पहने
दिव्य वस्त्र अलंकरण खास
किस करघे से काता गया
कुरता पीला,मखमली लिबास

चोंच में मोती भरे सजाये
अंबर के विस्तृत आँगन में
ध्रुवतारा हम भी बन जाये
मनु जीवन में सम्मान भरें
जीवन की निष्ठुरता से लड़
ऋतुओं की मनमानी से टूटे
चलो बटोरकर तिनकों को
फिर से एक नई उड़ान भरें

सुनो, ओ हवाओं न थामो दुपट्टा,
धड़कन को होता है उनका भरम।
मालूम हो तो सुकूं आये दिल को,
तुम बिन बिताने है कितने जनम।
ज़िद में तुम्हारी लुटा आये खुशियाँ,
सिसकते है भरकर के दामन में ग़म।

तुम्हारे स्वर के
आरोह-अवरोह पर
लिखे प्रेम-पत्र
तुम्हारी रुनझुनी बातें
हवा की कमर में खोंसी
पवनघंटियों-सी
गुदगुदाती है
शुष्क मन के
महीन रोमछिद्रों को।

दर्द,ग़म,तड़प,अश्क और रूसवाई,
इश्क़ ने जहाँभर की खाक़ छानी है
बेहया दिल टूटकर भी धड़कता है
ज़िंदा लाशों की ये तो बदज़ुबानी है
.....
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
.....
पम्मी सिंह की माताश्री
स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं
पम्मी जी उनके साथ हैं
ईश्वर उन्हें शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ करें
यही कामना
सादर
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यहाँ देखिए
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पम्मी सिंह की माताश्री
स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं
पम्मी जी उनके साथ हैं
ईश्वर उन्हें शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ करें
यही कामना
सादर