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बुधवार, 6 जनवरी 2016

172...भारत मां के इन सातों वीर सपूतों को नमन।

जय मां हाटेशवरी...

पंजाब के पठानकोट में एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले में...
हमने अपने इन    सात जांबाज सपूतों को खो दिया...
हवलदार कुलवंत सिंह...
लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन सिंह...
कैप्टन फतेह सिंह...
हवलदार संजीवन सिंह राणा...
हवलदार जगदीश चंद्रा...
गुरुसेवक सिंह...
मोहित चंद...
घर की याद उन्हे भी आती होगी
उनकी आँखे भी नम होती होगी
दो पल उन यादो को संजोकर
नयन पोंछ मुस्कुरा पड़े है
                                       दुश्मन की गोली सिने पर खाई
                                       कतरा कतरा लहू है बहता
                                       आखरी लम्हो में भी कहता
                                       विजयी हो मेरी भारत माता
उनके लिए हमारे नयन भरे है
देश के लिए जो दीवाने हुए है
उन्हे हाथ हमारे,सलामी करते
जिनकी वजह से हम महफूज़ रहते
                                         भारत मा का भी हृदय हिलता है
                                         जब उसका कोई बेटा गिरता है
                                         मर कर भी जो अमर रहता है
                                         ज़माना उन्हे शहिद कहता है.

       नमन हैं
उस शहादत को
जो अपनी अल्प आयु देकर
सब को लंबी आयु देते हैं...
अब देखिये आज के पांच लिंक...


उठो आगे बढ़ो,
ये-जिंदगी देती नहीं लेती है !
तुम्हे कुछ लेना है इससे ,
तो टकराना होगा ,
खुद बनाना होगा रास्ता अपना!
एक बार मिली है जिंदगी,
हर दिन मरना है ,
या इसे मात दे हर पल में,
हजार गुना जीना है

मानो पंथी तो क्या
किसी पंछी को भी
ना दिखती हो
मेरे घर की मुंडेर
या मेरे आंगन में लगा आम का पेड़,..
यूं लगता था मानो
मेरे भीतर का सूनापन
बिखर गया हो
मेरे जीवन के साथ साथ

चले गए क्यों दूर,मेंहदी आज पुकारे
विरला वो जाँबाज , देश पे जाँ जो वारे
रोते हैं माँ, बाप ,बहन ने भाई खोया
सरिता खोकर वीर, देश है सारा रोया ।।

अब .........न है रुई धुनने वाला ,
न ही गली मे गूँजती उसकी आवाज़ ,
न अम्मा की झिड़की ,
न रही कंबल मे पहली सी गर्माहट ..............

बंदा पागल हो गया। कई दिन मेंटल ट्रीटमेंट में रहना पड़ा। जुगाड़ लगा कर वो अपने कस्बेनुमा शहर लौटा। मगर यहां एक और सदमा इंतज़ार करता मिला। अब यहां भी शापिंग
माल और मल्टीप्लेक्स उग आये हैं। छायादार दरख़्त गायब हैं। सड़कें पहले की तरह ही संकरी और टूटी-फूटी हैं। वाहनों के साथ हादसों की संख्या भी बढ़ी है। सरकारी अस्पतालों
से डाक्टर गायब हैं। प्राईवेट अस्पताल खूब फल-फूल रहे हैं।
बंदा चकरा गया। मेंटल ट्रीटमेंट के लिए उसे फिर उसी बड़े को शहर रेफर कर दिया गया।


धन्यवाद...
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