।। उषा स्वस्ति।।
"बहुत दिनों के बाद खिड़कियाँ खोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना!
जड़े हुए थे ताले सारे कमरों में
धूल भरे थे आले सारे कमरों में
उलझन और तनावों के रेशों वाले
पुरे हुए थे जले सारे कमरों में
बहुत दिनों के बाद साँकलें डोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना!"
कुँवर बेचैन
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आज हम सभी की प्यारी यशोदा दी का
अवतरण दिवस है..
हार्दिक शुभेच्छा संग
जन्मदिन की अशेष बधाईयाँ।
स्वस्थ समृध्द एवं दीर्घायु जीवन के संग।
जन्मदिन आपको मुबारक हो,
फ़लक से जमीन तक रौनक हो
हर ख़ुशी आपके चरण चूमे
और आँगन में रोशनी झूमे
🎂🎂🍨🍮🍮👑
बंसत के सौन्दर्य एवम् माधुर्य को अभिव्यक्त करती शब्दों के साथ नज़र डाले शब्द- सृजकों के लिंकों पर..✍
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आ० रश्मि प्रभा जी...शोर में खुद को डुबोते लोग !
जब जब मन का दरवाजा खोलकर
बाहर देखा है
एक बेबस शोर देखा है
और उस शोर में खुद को डुबोते लोग !
इन्हें देखकर,
कोई धारणा मत बनाओ
सब के सब हारे हुए हैं...
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आ० रिया शर्मा जी...लड़की कब समझेगी
अभी वह अपने बचपन में अठखेलियां करती है। बेखबर है दुनिया के रंग -ढंग से। खुश है। खेल रही है अपने मेमने के साथ। प्यारे मेमने को वह सोमू कहती है। दे रही है उसे अपना सम्पूर्ण स्नेह और प्रेम।..
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आ० मीना शर्मा जी...मौन दुआएँ अमर रहेंगी !
श्वासों की आयु है सीमित
ये नयन भी बुझ ही जाएँगे !
उर में संचित मधुबोलों के
संग्रह भी चुक ही जाएँगे !
संग्रह भी चुक ही जाएँगे
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आ० जेन्नी शबनम जी... ऑक्सीजन
अभी वह अपने बचपन में अठखेलियां करती है। बेखबर है दुनिया के रंग -ढंग से। खुश है। खेल रही है अपने मेमने के साथ। प्यारे मेमने को वह सोमू कहती है। दे रही है उसे अपना सम्पूर्ण स्नेह और प्रेम।..
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आ० आत्ममुग्धा जी..आता और जाता समय
हल्की गुलाबी ठंड वाली शाम के बाद की रात थी उस दिन.....
नहीं, रात नहीं... शायद शाम की बत्ती का समय था।
पूजा किचन में गयी, क्या बनाऊँ ?
कुछ समझ न आया तो बाहर सोफे पर आकर पसर गयी। कभी कभी उस पर आलस बहुत हावी हो जाता है और उस दिन
वो ऐसे ही मोड में थी।
अचानक फोन की घंटी बजी। उसने फोन हाथ में लिया और देखा तो एक नाम स्क्रीन पर आ रहा था..
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आ० जेन्नी शबनम जी...आँक्सीजन
मेरे पुरसुकून जीवन के वास्ते
तुम्हारा सुझाव -
जीवन जीने के लिए प्रेम
प्रेम करने के लिए साँसें
साँसें भरने के लिए ऑक्सीजन
ऑक्सीजन है प्रेम
और वह प्रेम मैं तलाशूँ...
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आ० चन्द्र भूषण 'गाफिल' जी...
पर लोग समझते हैं के गाने के लिए है
है सच के ये दुनिया तो दीवाने के लिए है
कुछ लोगों का आना फ़क़त आने के लिए है
तू देख ज़माना ही है इस ज़ीस्त की बाबत
मत सोच के यह ज़ीस्त ज़माने के लिए है..
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हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
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।। इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ‘तृप्ति’..✍



