सादर अभिवादन..
भाई कुलदीप जी एक
विवाह कार्य पर हैं
सो हम हैं न आज...
सोचे थे कि आज आपका परिचय
हमारी नई चर्चाकारा
सखी मीना भारद्वाज की से कराएँ
पर खेद है कि मुहुर्त नहीं था आज...
जून माह का प्रथम दिवस शुभ है
लीजिए आनन-फानन प्रस्तुति का आनन्द...
भाई कुलदीप जी एक
विवाह कार्य पर हैं
सो हम हैं न आज...
सोचे थे कि आज आपका परिचय
हमारी नई चर्चाकारा
सखी मीना भारद्वाज की से कराएँ
पर खेद है कि मुहुर्त नहीं था आज...
जून माह का प्रथम दिवस शुभ है
लीजिए आनन-फानन प्रस्तुति का आनन्द...
बुन कर दिनकर थक गया, धूप छाँह का जाल
साँझ हुई करघा उठा, घर को चला निढाल !
करना पड़ता सूर्य को, सदा अहर्निश काम
देश-देश जलता फिरे, बिना किये विश्राम !

मन कितनी भी
कसरत क्यूँ न कर ले
पर तेरी यादों का वज़न
कम होने का नाम ही नहीं लेता

कभी-कभार मुझे ज़रूरत पड़ती है,
तो मैं उसकी ओर देख लेता हूँ,
वह सही समय बता देती है,
फिर मैं उसे भूल जाता हूँ.
रात को उसकी टिक-टिक गूंजती है,
तो अलमारी में रख देता हूँ उसे.
आईना जब जब निहारती हूँ मैं
अक्स उसका ही ढालती हूँ मैं...
रतजगे कह रहे मेरी आँखों के
उसके ख़्वाबों में जागती हूँ मैं....
जाने कूचे से कब गुज़र जाए
रस्ता उसका यूँ ताकती हूँ मैं..
शब्दों के माया-जाल में हम फँसते चले जाते हैं।
बुरे शब्द पर रोते और अच्छे पर हँसते चले जाते हैं।
अक्षरों के संयोजन से बनाते हैं..... हम शब्द,
शब्दों के संयोजन से वाक्य- लेख रचते चले जाते हैं।
बस आज यहीं तक...
आदेश की प्रत्याशा में
यशोदा
बस आज यहीं तक...
आदेश की प्रत्याशा में
यशोदा

