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गुरुवार, 19 नवंबर 2015

124......बिन बेटी के घर में उजाला कहा होता है !!

आप सभी को संजय भास्कर का नमस्कार
एक बार फिर हाजिर हूँ
आज के अंक में सिर्फ और सिर्फ
बेटियाँ
प्रस्तुत है
प्यार भरी रचनाओं की कड़ियाँ
लुत्फ उठाइए  मेरे साथ:))


लाख जलाओ घी के दीपक
रोशनी के लिए
बिन बेटी के घर में
उजाला कहा होता है !!


पलकों में पली साँसों में बसी माँ की आस है बेटी
हर पल मुस्काती गाती एक सुखद अहसास है बेटी


वो नन्हे कदमों से ठुमक ठुम चलना, 
    वो हँसना किलक कर गलेबाँह धरना,
    वो सोना लिपटकर सुनकर नन्ही परी,


बाबुल की सोन चिरैया 
अब बिदा हो चली
महकाएगी किसी और का आँगन
वो नाजुक सी कली
माँ की दुलारी
बिटिया वो प्यारी
मेरा मन पंछी सा.......रीना मौर्या :)

सो जा री  बिटिया ,
प्यारी प्यारी बिटिया
सुंदर सुंदर बिटिया, तू न्यारी न्यारी
बिटिया
सो जा री बिटिया
प्यारी प्यारी बिटिया..........नवीन कुमार :)

इसी के साथ आप सभी से इज़ाज़त चाहता हूँ

-- संजय भास्कर

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