।।भोर वंदन।।
कुछ इस तरह से शामिल हूँ
आज की विचारों से कि हर्फों के गौहरों में से एक गौहर चुनना मुश्किल हुए जाती..
फिलहाल इन लिंकों का लुत्फ़ उठाए..✍
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कुछ इस तरह से शामिल हूँ
आज की विचारों से कि हर्फों के गौहरों में से एक गौहर चुनना मुश्किल हुए जाती..
फिलहाल इन लिंकों का लुत्फ़ उठाए..✍
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आदमी अंधी गली में ढूंढता है आसरा
आजकल खामोश ‘मोचीराम’ ‘धूमिल’ का हुआ
बोलता था तांत की तनकार में हरदम खरा
इक अजब सी तिक्तता घुलने लगी है स्वाद में
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सुनने में पहले जरूर थोड़ा अटपटा टाइप लगता था। मगर अब आदत-सी हो गई। यों भी, आदतें जितनी व्यावहारिक हों, उतनी ठीक। ज्यादा मनघुन्ना बनने का कोई मतलब नहीं बैठता। यह संसार सामाजिक है। समाज में किस्म-किस्म के लोग हैं।
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कौन कहता है कि
हमने गम नहीं देखा
हमने बहुत गम खाया है
हर बात पर पलटवार न करके
मन को समझाया है |
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कुछ खट्टी
कुछ मीठी
स्मृतियां होती हैं
तन्हाइयों की साथी
कुछ स्मृतियां
मन को बहलातीं..
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मैंने कुछ लोगों को देखा है
मैंने कुछ लोगों को देखा है
जो बहुत चुपके से आपके
जिस्म को छू लेते हैं जैसे
रेंगता हुआ कीड़ा !
आपके जिस्म में छेद करके
धीरे धीरे वो अंदर तक उतर जाएं
हम-क़दम के छियालिसवांं विषय
यहाँ
देखिए
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍
जो बहुत चुपके से आपके
जिस्म को छू लेते हैं जैसे
रेंगता हुआ कीड़ा !
आपके जिस्म में छेद करके
धीरे धीरे वो अंदर तक उतर जाएं
हम-क़दम के छियालिसवांं विषय
यहाँ
देखिए
🎆
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍




