सादर अभिवादन.....
आज से प्रारम्भ
उत्तर भारत में
सूर्योपासना....
उत्तर भारत में
सूर्योपासना....

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से मनता ये त्योहार,
सर्वेभवन्तु सुखिना इस पर्व का है आधार।
त्रेता-द्वापर काल से मनता आ रहा ये पर्व,
चार दिनों तक चलता सूर्योपासना का पर्व।
छठी मैया की करते सूर्यदेव भी उपासना,
सब जन त्योहार मनाएँ होती निर्मल भावना।

कार्तिक शुक्ल की षष्ठी के पावन उत्सव,
छठ पर्व का उत्तर भारत में उल्लास!
पटना के घाट पर हमहू अर्जिया देबइ,
हे छठी मैया हम ना जाईब दूसर घाट देखब ये छठी मैया!!
ऐसे ही अन्य भक्ति गीतों के साथ आरम्भ हो चुका है
उत्तर और पूर्व भारत के कई हिस्सों में छठ पूजा का खुमार।
हर साल दिवाली का पवित्र त्यौहार ख़त्म होते ही
एक हफ्ते बाद शुरू होता है छठ पूजा का पवित्र त्यौहार

मैं तुझ पे यकीन करूं कैसे
तुम्हारे मन को मैं जानूं कैसे
वक्त चाहिए खुलने में गिरहें
है सब कुछ ठीक मानूं कैसे

असली तस्वीर तो अपने शहर के
भद्रजनों की इस कालोनी का यह चौकीदार है
और उसके सिर ढकने के लिये प्रवेश द्वार
पर बना छोटा सा यह छाजन है,
जहाँ एक कुर्सी है और शयन के लिये
पत्थर का पटिया है।

मेरा नन्हा झूल रहा था
मेरी आस के पलने में
किसलय सा कोमल सुकुमार
फूलों जैसी रंगत
मुस्कानो के मोती लब पे
उसकी अनुगूँज अहर्निश
किलकारी में सरगम
उधर उम्मीदों के दीयों को
आंसूओं का तेल पिलाती
'व्हाट्सअप कॉल '
में खिलखिलाती
पोते- पोती सी आकृति
अपने पल्लुओं से
पोंछती, पोसती
बारबार बाती उकसाती!
पुलकित दीया लीलता रहा
अमावस को।
आज बस इतना ही
आज्ञा दें
यशोदा ...
आज्ञा दें
यशोदा ...
