राजनेताओं के आरोप-प्रत्यारोप की राजनीतिक से बेमतलब की बयानबाजी और बहस,
चुनाव का चढ़ता पारा, जनता की मौसम के अनुरुप पानी-बिजली की गंभीर समस्या,
विदेश में जूते पर हुआ बवाल, जैसे और भी अनेकोंनेक मुद्दों को पीछे छोड़ते हुई
शीर्ष पर सिंहासनारूढ़ है अजब रुप-रंग से भरी गीष्म ऋतु।
चुनाव का चढ़ता पारा, जनता की मौसम के अनुरुप पानी-बिजली की गंभीर समस्या,
विदेश में जूते पर हुआ बवाल, जैसे और भी अनेकोंनेक मुद्दों को पीछे छोड़ते हुई
शीर्ष पर सिंहासनारूढ़ है अजब रुप-रंग से भरी गीष्म ऋतु।
कहीं आँधी-तूफान,कहीं बर्फबारी और कहीं
धूप के बढ़ते गुस्से से घबराये हुये पेड़ दिन चढ़ते ही छाँव की तलाश में मुरझाये से लगने लगते हैं,
जानवर छटपटाये नालियों के आस-पास, पेड़ों से सटकर निश्चल, निढ़ाल पड़े रहते हैं,
पसीने की बाढ़ से परेशान,असह्य गरम हवाओं से भयातुर दफ्तर के कर्मचारी, बॉस,
या घर पर गृहिणी हो या बच्चे सब अपनी सुविधानुसार पंखे,कूलर या ए.सी में जरा-सा
सुकून की आस में सुबह से लेकर रात तक परेशान हैं।
जानवर छटपटाये नालियों के आस-पास, पेड़ों से सटकर निश्चल, निढ़ाल पड़े रहते हैं,
पसीने की बाढ़ से परेशान,असह्य गरम हवाओं से भयातुर दफ्तर के कर्मचारी, बॉस,
या घर पर गृहिणी हो या बच्चे सब अपनी सुविधानुसार पंखे,कूलर या ए.सी में जरा-सा
सुकून की आस में सुबह से लेकर रात तक परेशान हैं।
प्रकृति की इस विषमताओं से भरे अनूठे रुप में व्यापक संदेश छुपा कि आप भी अपने जीवन के
हर उतार-चढ़ाव और बदलाव को सहज ले तभी जीना आसान होगा।
हर उतार-चढ़ाव और बदलाव को सहज ले तभी जीना आसान होगा।
||सादर नमस्कार||
चलिए अब हम चलते है आपके सृजन के संसार में-
💠🔴💠
सबसे पहले पढ़िये हमक़दम के विषय पर आदरणीय यशोदा जी का अद्भुत सृजन
रात देखा था
इक ख़्वाब सा
किया था हमने
इज़हार प्यार का
कर रहा हूँ इन्तेज़ार
तेरे इकरार का
🌸🌸🌸🌸🌸🌸
आदरणीय विश्वमोहन जी
की निष्पक्ष लेखनी से सृजित बेहद सारगर्भित,वैचारिकता से ओत-प्रोत
समसामयिक सुंदर,संदेशात्मक लेख
ऐसा न हो कि संपेरो के देश का संपेरा अपनी बीन भूल जाए और सांप की फुफकार
पर स्वयं नाचने लगे. अलादीन का चिराग यहाँ के लिए एक आयातित चिराग है
जिसका इस्तेमाल कुछ ख़ास किसिम के फिरकापरस्त खास खास समयों में
अपनी रोटी सेंकने के लिए करते हैं. समय आते ही चिराग रगड़ देते है।
पर स्वयं नाचने लगे. अलादीन का चिराग यहाँ के लिए एक आयातित चिराग है
जिसका इस्तेमाल कुछ ख़ास किसिम के फिरकापरस्त खास खास समयों में
अपनी रोटी सेंकने के लिए करते हैं. समय आते ही चिराग रगड़ देते है।
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
एक पुत्री के मन के कोमल भाव अपने पिता के प्रति अप्रतिम स्नेह उकेरती
आदरणीय पुरुषोत्तम जी की हृदयस्पर्शी,भावुक रचना
आदरणीय पुरुषोत्तम जी की हृदयस्पर्शी,भावुक रचना
बरखा बहार मैं, थी मेघा मल्हार मैं,
हर बार पाई तेरा दुलार मैं,
अब जाऊंगी कहाँ उस पार मैं,
न अलविदा तेरे मन से है होना मुझे,
विदाई का उपहार, यही देना मुझे!
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
सदैव अपनी लेखनी से संदेशात्मक और सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करने वाली सुंदर लेखनी से पढ़िये
आदरणीया कुसुम जी की बहुत सुंदर रचना
अतृप्त सा मन कस्तुरी मृग सा
भटकता खोजता अलब्ध सा
तिमिराछन्न परिवेश मे मूढ मना सा
स्वर्णिम विहान की किरण ढूंढता
छोड घटित अघटित खोजता ।
जीवन पल पल एक परीक्षा...
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
भावपूर्ण हृदय की एक संवेदनशील अभिव्यक्ति आदरणीय रंगराज सर
की कलम से पल्लवित सुंदर रचना
की कलम से पल्लवित सुंदर रचना
सुख दुख भी मन में सिमट जाएँगे
कितना सँभालोगी सुख दुख का ये बोझ तुम,
इक दिन तुमको लेकर ये ढल जाएगी,
🌸🌸🌸🌸🌸🌸
और चलते-चलते आदरणीय लोकेश जी की लिखी शानदार और लाज़वाब गज़ल
उमड़ पड़ा है ये तूफ़ान देखकर तुमको
मुद्दतों से जिसे इस दिल में दबाये रक्खा
रही बिखेरती ख़ुश्बू नदीश की ग़ज़लें
एक-एक हर्फ़ ने अहसास बनाये रक्खा
🌸🌸🌸🌸🌸
हमक़दम के विषय के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ देंखें
हम-क़दम के अट्ठाहरवें क़दमका विषय...
...........यहाँ देखिए...........
आपके द्वारा सृजित रचनाओं का संसार आपको.कैसा लगा कृपया अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।
आपके सुझावों की प्रतीक्षा में





