हाज़िर हूँ मैं आपके बीच आज पाँच लिंकों का आनंद ले कर ....प्रयास तो है कि आप सभी आनंदित हों ...... लेकिन फिर भी कुछ भूल चूक हो भी जाती है । अपने पाठकों से इतनी ही विनती है कि हर चर्चाकार काफी मेहनत से लिंक्स को अपनी चर्चा में लाता है , केवल उसका यही ध्येय होता है कि आप लोगों तक वो अच्छे से अच्छे लेखन को पहुँचा सके । अपनी तरफ से अपनी पसंद के साथ पाठकों की पसंद का भी ख्याल उसके ज़ेहन में होता है , तो पाठकों की जो प्रतिक्रियाएं आती हैं उसी के आधार पर लिंक्स का चयन करने में चर्चाकार को मदद भी मिल जाती है ।
पाँच लिंको के आनंद के सभी पाठकों का अभिनंदन करते हुए एक विनती है कि अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत ज़रूर कराएँ जिससे हम आपकी रुचि के अनुसार लिंक्स खोज सकें ।
हमारी एक पाठिका ने टिप्पणी करते हुए एक विचार दिया --
(प्रसंगवश कहना चाहूंगी , प्राय मंच पर गद्य विधा उपेक्षित रही है | गद्य लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए गद्य रचनाओं को मंच पर स्थान दिया जाना बहुत जरूरी है ताकि रचनाकार का मनोबल बढ़े और पाठकों तक सार्थक सृजन की पहुँच बने ) रेणु
आपकी बात को ध्यान में रखते हुए आपको एक ऐसे ब्लॉग का पता बता रही हूं जहाँ केवल आप उस ब्लॉग के संचालक की ही नहीं बल्कि बहुत अच्छी लघु कथा लिखने वाले अनेक लेखकों की लघु कथाएं पढ़ने को मिल सकती हैं ।
सुधा भार्गव जी की कहानियाँ और लघु कथाएँ काफी समय से पढ़ती रही हूँ आप भी उनके लेखन से परिचित होइए ।
सुधा जी ने ही एक और ब्लॉग बनाया है " जनजीवन धारा "
इस पर अन्य कथाकारों की लघुकथाएँ पढ़ने को मिलेंगी .
मंजु मिश्रा जी कई विधाओं में लेखन करती हैं ।विशेष रूप से कविताएँ , और हाइकु में सिद्धहस्त हैं । लेकिन आज एक लघुकथा लायी हैं --- अब कथा जो है वो वैसे ही लघु है तो उसके बारे में लिखूँ क्या , आप स्वयं ही जा कर पढ़ें कि वक़्त के साथ कैसे बदलते हैं दृष्टिकोण ......
हांलांकि हमारी पाठिका ने लेखों के लिंक लगाने की फ़रमाइश की थी , आपका सुझाव ध्यान में रख लिया गया है । वैसे इस मंच पर कई बार अनेक लेखों के लिंक्स अक्सर दिखाई दिए हैं । फिर भी पाठकों को संतुष्ट करने का हम प्रयास करेंगे ।
चलिए अब ले चलते हैं आपको काव्य विधा की ओर और मैं आपके लिए लायी हूँ अपनी पसन्द की कविताओं के लिंक ---
ज्योति खरे जी ने गज़ब ही लिखा है ... भीतर तक डूबना ,,, चन्दन जैसा महकना कितने प्यारे एहसास ...
और यथार्थ में कहाँ ला कर ख़त्म की अपनी बात कि प्रेम का गणित समझ नहीं पाए ...प्रेम के गणित में भले ही फेल हो गए हों लेकिन बचपन से ही जो पास फेल का खेल चलता है वो बार बार ले जाता है बचपन की गलियों में और बचपन की गलियों की सैर बड़ी भली लगती है ।
मन्टु कुमार जी के मन के कोने से उठा लायी हूँ एक कविता जिसको पढ़ते हुए कुछ ऐसे विचार आये थे मन में ---कविता पढ़ कर लगा कि आप अमृता प्रीतम के बहुत बड़े प्रशंसक हैं ... उस समय के सभी लेखकों क नाम इस कविता में शामिल है ... इतिहास पढने वाली लड़की और गणित पढने वाला लड़का .. वैसे आज के समय उल्टा भी सोचा जा सकता था .. :) :) नहीं क्या ? ...
आशा है आज की चर्चा ने आपको निराश नहीं किया होगा । कुछ और लिंक्स भी नज़र में थे लेकिन पाँच लिंक्स का आंकड़ा पूरा हो चुका और वैसे भी सबसे पहले वाले लिंक पर थोड़ी डंडी मार दी है इसलिए आज बस इतना ही ।
अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएँ । आलोचना , समालोचना सब स्वीकार है ।
फिर मिलते हैं अगले सोमवार , इसी समय , इसी मंच पर कुछ और नए पुराने लिंक्स ले कर ..... तब तक के लिए आज्ञा दें ।
नमस्कार
आपकी ही





