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मंगलवार, 15 सितंबर 2026

4866 ...ढल जाता है सूरज भी रोज़-रोज़, इसको कभी भी मात न समझो।

सादर अभिवादन
गणेश चतुर्थी व हरतालिका तीज की
सादर शुभकामनाएं

आखिर कांटा तो कांटा है 
जो जगह जगह चुभ जाता है ।
मन मे चुभता तन में चुभता
पीड़ा देकर मुस्काता है ।

कंटक पर ही खिलता गुलाब
संगति भी और विसंगति भी ।
पैरों में जब चुभ जाता है

रुकती गति भी , झुकती रति भी ।



- अरुणेश मिश्र 

देखिए रचनाएं....




देवता भी मरते हैं
उनकी भी यात्रा होती है,
कभी-कभी
हम इंसानों को उनका शव ढोना पड़ता है,
हड़प्पा और सुमेरियन सभ्यताओं के
तमाम देवताओं को इंसानों ने
डूबती सभ्यताओं के साथ दफन कर दिया,





है एक पल जो बीतता नहीं है 
समय गुजरता जाता है 
पर समय बीतता नहीं है।। 




इसको महज़ बात न समझो, 
बस एक मुलाक़ात न समझो।

ढल जाता है सूरज भी रोज़-रोज़, 
इसको कभी भी मात न समझो।


हो जाएगा रोशन हर पन्ना, 
बस कोरा एक दवात न समझो।






चलते - चलते एक छोटी सी मुस्कुराहट
एक राजा ने अपने जीजा की सिफारिश पर एक आदमी को मौसम विभाग का मंत्री बना दिया।
 - एक बार उसने शिकार पर जाने से पहले उस मंत्री से मौसम की भविष्यवाणी पूछी।
- मंत्री जी बोले "ज़रूर जाइए, मौसम कई दिनों तक बहुत अच्छा है!"
 - राजा थोड़ी दूर ही गया था कि रास्ते में एक कुम्हार मिला - वो बोला, "महाराज तेज़ बारिश आने वाली है... आप कहाँ जा रहे हैं?"
अब मंत्री के मुकाबले कुम्हार की बात क्या मानी जाती, उसे वही चार जूते मारने की सजा सुनाई और आगे बढ़ गये।
 - वही हुआ... थोड़ी देर बाद तेज़ आँधी के साथ बारिश आई और जंगल दलदल बन गया, राजा जी जैसे तैसे महल में वापस आए, पहले तो उस मंत्री को बर्खास्त किया;
फिर उस कुम्हार को बुलाया - इनाम दिया और मौसम विभाग के मंत्री पद की पेशकश की - कुम्हार बोला,  "हुज़ूर मैं क्या जानू, मौसम-वौसम क्या होता है?" वो तो
जब मेरे गधे के कान ढीले हो कर नीचे लटक जाते हैं, मैं समझ जाता हूँ वर्षा होने वाली है,
और मेरा गधा कभी ग़लत साबित नहीं हुआ!
- राजा ने तुरंत कुम्हार को छोड़ कर उसके गधे को मंत्री बना दिया -


तब से ही गधों को मंत्री बनाने की प्रथा चली आ रही है!



सादर समर्पित
वंदन

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