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सोमवार, 7 सितंबर 2026

4858...इतनी बजे बाद यह मत किया करो...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय राहुल उपाध्याय जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

रविवारीय अंक में आज पढ़िए पाँच चुनिंदा रचनाएँ-

भार्गव राम खण्डकाव्य - 56

आ गईं दिवस इक देवि  गंगा,

था साथ में उनका पुत्र देवव्रत।

कर रही प्रार्थना अब  गंगा थी,

भगवन! शिष्य बना लो देवव्रत।।

*****

वफ़ादारी

पर इतना ज़रूर है

कि वफ़ादार

एक किरायेदार है

जिसे मकान मालिक

कभी भी निकाल सकता है

किराया बढ़ा सकता है

यहाँ यह मत करो

वहाँ ये मत करो

इतनी बजे बाद यह मत किया करो

50 प्रतिबंध लगा सकता है

*****

शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएँ

परम कृपा के हम अभिलाषी

वाणी मधुर, शुद्ध हो जाये,

भाषा का विकास हो प्रतिपल

शब्दों में भी मौन समाये!

*****

राष्ट्र निर्माता और संस्कृति संरक्षक होता है शिक्षक

 'मालविकाग्रिमित्रम' नाटक में महाकवि कालिदास ने कहा हैं-
लब्धास्पदोऽस्मीति विवादभीरोस्तितिक्षमाणस्य परेण निन्दाम्।

यस्यागमः केवल जीविकायां तं ज्ञानपण्यं वाणिजं वदन्ति।। "

- अर्थात जो अध्यापक नौकरी पा लेने पर शास्त्रार्थ से भागता है, दूसरों के अंगुली उठाने पर चुप रह जाता है और केवल पेट पालने के लिए विद्या पढ़ाता है, ऐसा व्यक्ति पंडित (शिक्षक) नहीं वरन् ज्ञान बेचने वाला बनिया कहलाता है। लेकिन दुःखद पहलू है कि आज ज्ञान से पेट भरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा नजर आती है। स्वतंत्रता के पश्चात् जिस तीव्र गति से विद्यालयों की संख्या बढ़ी उस अनुपात में शिक्षा का स्तर ऊँचा होने के बजाय नीचे गिरना गंभीर चिन्ता का विषय है।

*****

 असली ताकत ऊँची आवाज़, रौब या दिखावे में नहीं, बल्कि..

इसलिए जीवन में न तो अपनी तारीफ सुनकर घमंड करना चाहिए और न ही किसी को इतना सिर पर चढ़ाना चाहिए कि वह दूसरों को छोटा समझने लगे। असली ताकत ऊँची आवाज़, रौब या दिखावे में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, संयम और विनम्रता में होती है। जो लोग खुद को साबित करने के लिए शोर नहीं मचाते, उनका खामोश आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनता है।

*****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


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