।।भोर वंदन।।
"एक किरण आई छाई,
दुनिया में ज्योति निराली
रंगी सुनहरे रंग में
पत्ती-पत्ती डाली डाली !
एक किरण आई लाई,
पूरब में सुखद सवेरा
हुई दिशाएं लाल
लाल हो गया धरा का घेरा !
~ सोहनलाल द्विवेदी
आज की पेशकश में शामिल रचनाए ✍️
शाख़-ए-वजूद
कुछ इस तरह फुसफुसाती है हवा,
शायद कोई ग़ज़ल सुनाती है हवा।
सुकून फिर भला कैसे नसीब हो,
ज़ख्मों को रोज़ छेड़ जाती है हवा।
यादों की राख अब भी गर्म है कहीं,
धीरे-धीरे फिर सुलगाती है हवा।
✨️
अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में
दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी..
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अगाध होते हैं रिश्ते दिलों के,
इक ज़माना था जो हम गाते,
तय पथ था और सफ़र अटल,
उम्मीदों पे कब तक ठहर पाते।..
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विषयों की तलाश में
भटकता हुआ
किसी कोने में
कहीं अटकता हुआ
बेसुध सा मन
यहाँ-वहाँ ..
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️

शुभ प्रभात
जवाब देंहटाएंकुछ इस तरह फुसफुसाती है हवा,
शायद कोई ग़ज़ल सुनाती है हवा।
सुकून फिर भला कैसे नसीब हो,
ज़ख्मों को रोज़ छेड़ जाती है हवा।
सुंदर अक
वंदन
jugaali.blogspot.com की रचनाओं को अपने इस लोकप्रिय मंच पर स्थान देने के लिए आपका आभार🙏
जवाब देंहटाएंjugaali.blogspot.com की रचनाओं को अपने इस लोकप्रिय मंच पर स्थान देने के लिए आपका आभार🙏
जवाब देंहटाएंसुप्रभात! सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रस्तुति
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