निवेदन।


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सोमवार, 5 जनवरी 2026

4614...ले चलो उस ऊँचाई पर जहाँ स्त्री एक प्रश्न नहीं, उत्तर लगती है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया अनीता सैनी जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

आइए पढ़ते हैं पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

उस ओर

ले चलो

उस ऊँचाई पर

जहाँ स्त्री

एक प्रश्न नहीं,

एक उत्तर लगती है।

उन रास्तों पर ले चलो

जहाँ हर सरसराहट

कोई कथा नहीं रचती है,

केवल

एक स्वीकार बनकर

मन में उतर जाती है।

*****

अमानत मेरी हो न हो चाहे

मेरे ख़्वाबों में बसते हो मुक़द्दर में हो न हो चाहे

लकीरों में तुझे देखूं अमानत मेरी हो न हो चाहे

कश्मक़श में जीती रख तुझे नज़र के समंदर में

उल्फ़त है मुझे तुमसे तुझे इक़रार हो न हो चाहे।

*****

ख़ामोश वापसी भाग–3 : उम्मीद का धीमा उजाला

बस इतना भरोसा है

कि जो भीतर बचा है,

वही काफ़ी है।

अब खुद पर शक नहीं

पहले हर शब्द लिखने से पहले

मैं खुद से पूछती थी

क्या यह अच्छा है?

क्या लोग पढ़ेंगे?

*****

नागरी प्रचारिणी सभा ने 'गुम' हो रही किताबों को दिया 'नया जीवन', रामचंद्र शुक्ल की कविता में हजारी प्रसाद का करेक्शन भी पढ़ने को मिलेगा

रामचंद्र शुक्ल ने 24 साल की उम्र में लिखी थी कविता क्या है? व्योमेश शुक्ल बताते हैं, इनमें एक है कविता क्या है? आचार्य रामचंद्र शुक्ल के हाथों का लिखा हुआ एक निबंध है. हिंदी साहित्य के मूर्धन्य लेखक रामचंद्र शुक्ल का जन्म 1884 में हुआ लेकिन, उन्होंने निबंध का पहला हिस्सा 1908 अपने 24 वर्ष की उम्र में पूरा किया और इस निबंध का अंतिम प्रारूप 1930 में छपा यानी जब उनकी उम्र लगभग 46 वर्ष थी. उन्होंने एक ही निबंध को अलग-अलग रूप में लिखा और उसे अलग-अलग पब्लिशर्स से प्रकाशित करवाया. लगभग 22 -23 वर्ष की अपनी यात्रा में उन्होंने एक निबंध को चार बार लिखा.

*****

नई जनता बना लेंगे

पहली पायलट रन रिपोर्ट सुबह पाँच बजे आई. रिकार्डो ने कॉफ़ी का घूँट लिया और पीडीएफ़ खोला. पहले पन्ने पर एक ग्राफ़ था: "जोखिम स्कोर बनाम जनसंख्या घनत्व." वह आगे बढ़ा. नामों की सूची शुरू हुई.

*****

फिर मिलेंगे।

रवीन्द्र सिंह यादव

 

रविवार, 4 जनवरी 2026

4613...बिना सोचे अपना रुख मोड़ लिया है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया कविता रावत जी की रचना से। 

सादर अभिवादन।  

हाज़िर हूँ रविवारीय अंक लेकर, पढ़िए पाँच रचनाएँ-

रेत की बुनियाद। गजल

किसी ने जो पहना, वही ओढ़ लिया है,
बिना सोचे अपना रुख मोड़ लिया है।


नहीं जानते खुद की फितरत क्या है,
बस भीड़ का हिस्सा बनना ही अदा है।
*****

विह्वल कुतिया

यह लड़की, सिर्फ़ 17 साल की थी जब इसे मौत की सज़ा सुनाई गई। 

वो बोली- मैं चाहती हूं कि यह पता चले, और यह क‍ि मैं याद किए जाने की हकदार बनी रहूं, यह भी सच है क‍ि वह मौत से डरती थी, हां, लेकिन वह इतनी बहादुर थी कि उसने अपने देश के लोगों को धोखा देने के बजाय फांसी पर चढ़ना पसंद किया।

*****

एक मामला, कई हल

मामला यह है कि अंजना निगम नामक एक संपन्न महिला की ज़हरभरी चॉकलेट खाने से मृत्यु हो जाती है। उन चॉकलेटों का पैकेट उसके पति मुकेश निगम को अपने एक साथी दुष्यंत परमार से प्राप्त हुआ था। दुष्यंत परमार को वह पैकेट डाक से मिला था जो कि प्रत्यक्षतः सोराबजी एंड संस नामक एक चॉकलेट निर्मात्री कम्पनी द्वारा उपहार स्वरूप भेजा गया था। अंजना ने अधिक चॉकलेट खाई थीं जबकि उसके पति मुकेश ने दो चॉकलेट खाई थीं एवं बीमार वह भी पड़ा था। प्रश्न यह है कि वे चॉकलेटें यदि सोराबजी एंड संस ने नहीं भेजी थीं तो किसने भेजी थीं एवं भेजने वाले का निशाना कौन था – अंजना निगम अथवा दुष्यंत परमार ? पुलिस इस मामले को नहीं सुलझा पाती एवं अंततः इसे क्राइम क्लब को सौंप देती है।*****सावित्री बाई फूले जयंती विशेष

सावित्रीबाई ने जलायी
बालिका शिक्षा की क्रांति,
महिलाओं को उठाया

अपमान से सम्मान की दहलीज तक।
*****
फिर मिलेंगे। 
रवीन्द्र सिंह यादव 

शनिवार, 3 जनवरी 2026

4612...बिरबा सींचें आशा के


शनिवारीय अंक में
आपसभी का हार्दिक अभिनन्दन।
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ऐसे समय में जब यह पवित्र हिमालयी तीर्थस्थल केदारनाथ धाम आमतौर पर 5-8 फीट बर्फ से ढका रहता है, दिसंबर समाप्त  हो चुका जनवरी की शुरुआत में भी बर्फ का नामोनिशान नहीं है।
केदारनाथ में बर्फबारी न होना जलवायु परिवर्तन,ग्लोबल वार्मिंग और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जो भविष्य में पानी की कमी, ग्लेशियरों के पिघलने और मौसम के अनियमित पैटर्न (जैसे सूखा और बाढ़) की ओर इशारा करता है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी और लाखों लोगों की जल सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
जाने भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है?

आज की रचनाऍं- 


समय साथ देता उनका ही ,
लक्ष्य बाँध चल देते जो ।
अर्थ आज के दिन को देकर  
दीप्तिमान कल लेते जो । 
पल पल को मुट्ठी में करलो 
काटो बन्ध दुराशा के ।



तू पुराण है तू नवीन है, तू प्रगट भी हो के विलीन है,
तू ही चिर-समाधि में लीन है, ये जगत भी तेरे अधीन है,
तू ही ज्ञान ध्यान प्रवीन है, तू ही शंभु-शंभु महेश्वरम्.
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम् …



जिम्मेदरियों ने मुझे झुकाया इतना 
पीठ मेरा देखो, ऐसे हो गया दोहरा 

नाराज हो जब, नदी बहाती भी है 
जब भी धार पर लगाया गया पहरा 



इन्हीं  रिश्तों  के  सहारे
कष्ट  कितने  भोग आये
उस डगर से बच तो आये
किन्तु  कितने  रोग लाये
 
जिंदगी  को  ओढ़ना था
और दुःख को ओढ़ आये
रिश्ते जो भी खून के थे
सारे हमको  छोड़  आये



बहुत बचपन का नव वर्ष तो याद नहीं। स्कूल के दिनों का याद है जब 19 दिसम्बर से बड़े दिन की छुट्टी शुरू हो जाती थी और शायद तीन-चार जनवरी को स्कूल खुलता था। उस ज़माने में न फ़ोन, न टी.वी. न रात में जश्न मनाने के लिए बिजली। जो करना है दिन में ही करना है। इसलिए 31 दिसम्बर के दिन या रात में कुछ भी ख़ास नहीं होता था, सिर्फ़ नए साल में ख़ास कार्यक्रम की की रूपरेखा तैयार होती थी। पहली जनवरी की भोर में पहला काम होता था कि उठते ही जो भी घर में है उसे हैप्पी न्यू ईयर बोलना। दुसरा काम घर के सभी कैलेण्डर को फाड़कर फेंकना। तीसरा काम अपनी कॉपी में पहली जनवरी की तारीख डालना। पिछले दिन तय किए हुए कार्यक्रम का क्रियान्वयन करना। सिनेमा जाना, किसी रेस्तरां में खाना, किसी के घर लोगों के सामूहिक भोजन में हिस्सा लेना (कभी कभी मेरे घर भी होता था) इत्यादि।



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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।







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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।


शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

4611...समय के साथ चल

शुक्रवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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कैलेंडर की तारीख बदल गयी,
२०२५ को विदा कर
वक़्त २०२६ का स्वागत कर  बेहद उत्साहित  है।
बीतता हर लम्हा कैसे इतिहास बन जाता है 
इसके साक्षात गवाह हम और आप है।

बेहद अजीब से एहसास है
ऑंख नम , गीले जज़्बात है।
 मेरी यादों के खज़ाने में
  आप बेशकीमती सौगात हैं।
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गुज़रता एक भी पल वापस न आयेगा।
 ख़ास पल स्मृति में रह-रह के मुस्कायेगा।
आनेवाले पल के पिटारे में क्या राज़ छुपा है
 यह आने वाला पल ही बतलायेगा।

जीवन की चुनौतियों और खुशियों का बाहें फैलाकर 
स्वागत करिये फिर तारीख़ चाहे कोई भी हो, साल चाहे कोई भी रहे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

समय के दंश को भूलने का प्रयास करते हुए
सकारात्मकता की ओर बढ़ते हुए-
आज की रचनाऍं- 


स्वागत! जीवन के नवल वर्ष 
आओ, नूतन-निर्माण लिये, 
इस महा जागरण के युग में 
जाग्रत जीवन अभिमान लिये; 

दीनों दुखियों का त्राण लिये 
मानवता का कल्याण लिये, 
स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष! 
तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।



हर बीता पल समय का स्पंदन 
लहर-लहर बहता नदी का जल
 
घूम-फिर कर फिर लौटेगा कल
क्षितिज तक नाव अपनी ले चल




सुस्वागत 2026,
इतना सा वादा कर लेना—
कि इंसानियत ज़िंदा रहे,
सच की आवाज़ कमज़ोर न पड़े,
और मेहनत करने वाले हाथ
कभी खाली न लौटें।




2026, आपका अभिनंदन......

कल्पनाओं का, उफन रहा, इक सागर,
लहरों की धुन पर, झूमता ये गागर,
हर आहट, हर कंपन, अनगिनत से ये स्पंदन,
आह्लाद लिए प्रतीक्षित क्षण,
नववर्ष, तेरा कोटि-कोटि अभिनंदन!




स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर ।
सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर ।
घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर,
सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।।


तिलिस्म 


आपने अब तक कुछ बताया नहीं कि मेरे यहाँ होने से क्या मुमकिन है मेरी तलाश..?? 
क्या पढ़ा आपने मेरे मस्तिष्क से हृदय तक जातीं रेखाएँ?? 
क्या मेरी उपमाओं में देखा आपने स्वयं का किरदार? 
क्या इन ख़तों से उग आए आपके आँगन में सितारों वाले गुल?? 
क्या आपकी हथेलियों पर महकता मिला ओध? 
क्या ख़ुमारी की झालर मिली आपकी  चौखट पर? 
क्या सुरों ने खींची इन्द्रधनुष की कोई कृति ??



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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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गुरुवार, 1 जनवरी 2026

4610...नव वर्ष 2026 मंगलमय हो...

 नव वर्ष 2026 मंगलमय हो!



सादर अभिवादन.

'पाँच लिंकों का आनन्द' परिवार की ओर से समस्त पाठकों,संस्थापकों, सहयोगियों एवं शुभचिंतकों को नव वर्ष 2026 की हार्दिक मंगलकामनाएँ.

हम आशा और विश्वास रखते हैं कि आपका रचनात्मक सहयोग और आशीर्वाद सतत मिलता रहेगा. कल से हमारी नियमित प्रस्तुति आपके समक्ष उपलब्ध हो सकेगी.

🙏

-पाँच लिंकों का आनन्द परिवार 

सोमवार, 22 दिसंबर 2025

4609...शोक-संदेश


🙏अश्रुपूरित श्रद्धांजलि 🙏

कभी सोचा न था
कभी कोई दिन ऐसा भी आयेगा;
आपकी, हम सब की 
अति प्रिय यशोदा दी के लिए
शोक संदेश लिखना होगा।
टाइप करते उंगलियॉं  कॉंप रही है,
यशोदा दी की पवित्र  आत्मा 
२० दिसम्बर को 
परमात्मा में सदा के लिए लीन हो गयी।

हमारे पांच लिंक परिवार ने अपनी

जननी को हमेशा के लिए खो दिया।

आभासी दुनिया का परिचय 
आभास मात्र नहीं एक जीवंत एहसास है।

आदरणीया यशोदा अग्रवाल जी

किसी परिचय का मोहताज़ नहीं।

पाँच लिंक का बीजारोपण करने वाली

स्नेही, सहृदय,पारखी दृष्टि और धैर्य की मूर्ति

हमारी यशोदा दी।

 ब्लॉगजगत में साहित्यिक अभिरुचि रखने वाली, स्वयं का परिचय एक पाठक के रुप में देती, 

सबसे चिरपरिचित चेहरा यशोदा दी। 

कैंसर जैसी अत्यंत कष्टदायक

बीमारी से जूझते हुए,

जीवन के संघर्षों का जीवटता से सामना करती रही हैं।

साहित्य के सागर से बेशकीमती मोती चुनकर उनको 

प्रोत्साहित करती हुई सच्ची साहित्य साधना में 

लीन रहीं तमाम उम्र। 

सुगढ़ प्रस्तुति में सदैव नया का प्रयास करती,

रचनाकारों का खुले हृदय से स्वागत करती हमारी 

यशोदा दी अब सदा के लिए स्मृतियों की सुगंध

बन गयीं‌।

चिट्ठाजगत को जीवंत रखने वाली

यशोदा दी का जाना अपूर्णीय क्षति है।

चिट्ठाजगत उनका विशेष योगदान

कभी नहीं भुला पायेगा।

मन उद्विग्न है और क्या लिखे शेष फिर कभी।

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प्रिय यशोदा दी के लिए उनके कुछ साथियों ने

संदेश प्रेषित  किया है।


आदरणीया पम्मी सिंह "तृप्ति"

यह जानकर मुझे बहुत दुख हो रहा है  यशोदा अग्रवाल (दी) जी संसार को परित्याग कर पंचतत्व में विलीन हो गई। 

उनके के जाने से ब्लोग जगत में जो रिक्तता बनी है, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। दस सालो का साथ , हर दिन कुछ लिखने,प्रस्तुतिकरण लिए  प्रेरित करते शब्द अनायास ही चुप हो गई। उनकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को धैर्य व संबल प्रदान करें।

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आदरणीय रवीन्द्र जी 


इस दुख की घड़ी में मन से हमारे साथ हैं।

वे पारिवारिक शोक कार्य में है।


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आदरणीय सुशील सर


यशोदा चली गई श्वेता से पता चला  |
 मुलाकात नहीं थी मगर रिश्ता मजबूत था |
 मिलने की इच्छा थी सोचा था कभी भिलाई जाऊंगा दीदी से मिलने तो रायपुर जा कर मिलकर आऊँगा | निराश नहीं हूँ मिलेंगे जरूर आगे | 

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आदरणीया संगीता स्वरूप दी


आज श्वेता के संदेश द्वारा दुखद समाचार मिला  कि प्रिय यशोदा अब हमारे बीच नहीं रही । हंलांकि काफी समय से स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रही थी लेकिन अपनी इच्छाशक्ति से वक़्त को मात देने में सफल थी । जहाँ तक मैंने उसके बारे में जाना और  समझा है वो बहुत मेहनती और लगन की पक्की थी । ये उसका ही प्रयास रहा जो हलचल का ब्लॉग पांच लिंकों का आनंद  अभी तक आप तक पहुँचता रहा । 

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे और परिवार को ये दुःख सहने की क्षमता दे । ॐ शांति ॐ । 🙏🏻🙏🏻


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आदरणीया विभा रानी श्रीवास्तव 


क्रूर काल किसी को रहने नहीं देगा -लेकिन किसी को अकाल ले जाता है तो कुछ कहने योग्य नहीं छोड़ता है यशोदा दिग्विजय अग्रवाल (छोटी बहना) का कल रात छीन लेना तेरा क्रूरतम निर्णय रहा 


कभी दीदी कभी माँ कह जाती थीं -बेहद प्यार सम्मान करती भी थीं-ब्लॉग जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है उनका उपकार साहित्य जगत सदैव याद रखेगा


ब्लॉगर संगी फेसबुक साथी


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आदरणीय विश्वमोहन जी


यशोदा जी नहीं रहीं। अंदर से कंपा देने वाला अत्यंत दुखद समाचार। हम भावनात्मक रूप से अपने को इतना सबल और सक्षम नहीं पा रहे कि कुछ बोल सकें। मन मलिन है। सर चकरा रहा है। आंखे निर्निमेष और आर्द्र हैं। दृष्टिपथ धूमिल है। विचार - तंत्रिकाएं सन्निपात- सी शिथिल हैं। हमें यश देनेवाली, यशोदा अब हमारी स्मृतियों की धरोहर बन गई। सुर धाम को वह अब शांति प्रदान करें और हमें आशीष! 🙏🏻🌹🙏🏻


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आदरणीया मीना भारद्वाज जी

ब्लॉग जगत ने एक संवेदनशील स्वर, एक मौन विचारक और एक सहज लेखिका को खो दिया है ।ब्लॉग जगत की प्रिय यशोदा दी नहीं रहीं ।

     इस दुखद घटना जिस पर हृदय को यकीन ही नहीं है कि ऐसा कैसे संभव है ?लग रहा है अभी पाँच लिंकों का स्तंभ पर जाऊँगी और उनकी लगाई प्रस्तुति पढ़ने को मिलेगी । कोई पोस्ट अपने ब्लॉग पर पोस्ट करूँगी और उनका आमन्त्रण होगा -“आपकी यह रचना कल पाँच लिंकों का आनन्द में सम्मिलित की जाएगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं ।”

वे न केवल शब्दों की शिल्पी थी बल्कि मानवीय भावनाओं की मर्मज्ञ और कुशल चितेरी भी थीं ।उनका जाना,  सिर्फ एक जीवन का अंत नहीं,  बल्कि ब्लॉग जगत के एक  युग के अनुभवों का विराम है।

   मैं  श्रद्धा और संवेदना के साथ  उन्हें नमन करती हूँ और अश्रुपूरित हृदय से ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान कर अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों के साथ पाँच लिंकों का आनन्द परिवार को दुःख सहने की शक्ति दें 🙏


शब्द मौन हैं .., दुःखी हृदय से आदरणीया यशोदा जी को अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏


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आदरणीया रेणु दी


ये ह्रदय विदारक सन्देश मिला!

 बहुत दुःख हुआ जिसको शब्दों में 

 लिखना सम्भव नहीं!

 ये ब्लॉग जगत भी हमारा दूसरा

 परिवार बन चूका है! प्रभु उनकी

 आत्मा को शान्ति प्रदान करे!🙏


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आइए हम सब मिलकर 

प्रार्थना करें।

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