सादर अभिवादन
आ गया जुलाई
टिफिन, रिक्शा, बस का चक्कर
होता मन में धक-धक
मेरी पसंदीदा रचनाएं
प्रेम का चोली-दामन सा साथ हो,
तो जीवन महक उठता है,
पर मर्यादा खोने वाले का,
जग में मान घट जाता है।
वरना ऐसी विपदा आएगी,
फिर चैंदिया खुजानी पड़ जाएगी,
समय की मार पड़ी जो सिर पर,
चैंदिया पर बाल न छोड़ेगी।
ठेले वाले की आँखों में जो चमक आई, भाई साहब... सीधे अंबानी वाली थी!
उसने मैडम को आधा नींबू-पानी मिला जूस थमाया, मैडम ने एक घूंट पिया और बोलीं—
"वाह! एकदम प्योर शुगर-फ्री है, गन्ने का स्वाद भी आ रहा है और कैलोरी भी नहीं है!"
"वाह! एकदम प्योर शुगर-फ्री है, गन्ने का स्वाद भी आ रहा है और कैलोरी भी नहीं है!"
₹120 देकर मैडम तो पतली कमरिया मटकाते हुए चली गईं, पर पीछे हम दोनों का बिजनेस सेट हो गया!
हर बुझी हुई राख में—
एक ऐसी चिंगारी अब भी जीवित रहती है,
जो यदि एक बार विश्वास की हवा पा जाए,
तो
केवल एक दीपक नहीं,
पूरे आकाश को फिर से रोशन कर सकती है।
हंसी खोखली सी आती है, आंसू खारे लगते
रोज सुबह सूरज की किरणें आकर मुझे जगाती
प्रात काल की हवा थपेड़े देकर नींद भगाती
बासीपन सारा हट जाता , तन हो जाता
ताजा मेरा मन चेतन हो जाता ,अपनेपन का राजा
पंच इन्द्रियों से हम जानें
उत्पन्न होकर बढ़े व मिटे
दो पंछी रहते हैं जिस पर
एक सनातन वृक्ष जगत है !
सादर समर्पित
सादर वंदन




