निवेदन।


फ़ॉलोअर

4766 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
4766 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 7 जून 2026

4766 ..सीमेंट की दीवारों ने आकाश का हिस्सा खरीद लिया है।

 सादर अभिवादन 
नौतपा खत्म 


काले मेघा, काले मेघा, 
पानी तो बरसाओ
बिजुरी की तलवार नहीं,
 बूँदों के बान चलाओ
मेघा छाये, बरखा लाये
घिर-घिर आये, घिर के आये




याद आने के लिए अनुमति जरूरी नहीं
ब्लॉक करके भी क्या ब्लॉक कर पाएंगे
झोंका हवा का जहां चाहे पहुंच जाता है
इस पहुंच से भला कब तक दूर जाएंगे





धरती के दोनों ध्रुवों पर पर बसने वाले 
छोटे-छोटे मुल्कों को 
झेलनी पड़ रही है सजा 
उस जुर्म की, जो उन्होंने किया ही नहीं 
हर रोज़ मरते हैं हरित वन 
और जन्मते हैं कंक्रीट के जंगल 
हर रोज़ उगलते हैं करोड़ों वाहन, धुआँ 




मात यशोदा के घर आये
वहाँ नंद के लाल कहाये।
मोर पंख से सजता कुंतल
कानों में झूला था कुंडल।
जब जब मुख पर दधि लपटाए
नटखट बन अँखियाँ मटकाए।
खूब चराते हो तुम गैया
किये सर्प पर ता ता थैया।




ए ज़िंदगी,
ज़रा आहिस्ता चल।
क्यों बेतहाशा भागती है,
बदहवास दौड़े जाती है।
ज़रा रुक, दम भर तो ठहर,
ऐसी भी क्या जल्दी है।





पत्थर की छतों पर
अब धूप नहीं उतरती,
सीमेंट की दीवारों ने
आकाश का हिस्सा खरीद लिया है।
जहाँ कभी
काफल की डालियों पर
बचपन झूलता था,
वहाँ अब मोबाइल टावर खड़े हैं
और पक्षियों की जगह
नेटवर्क के सिग्नल चहकते हैं।


सादर समर्पित
सादर वंदन
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...