शीर्षक पंक्ति: आदरणीया अनीता सैनी जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
ले चलो
उस ऊँचाई पर
जहाँ स्त्री
एक प्रश्न नहीं,
एक उत्तर लगती है।
उन रास्तों पर ले चलो
जहाँ हर सरसराहट
कोई कथा नहीं रचती है,
केवल
एक स्वीकार बनकर
मन में उतर जाती है।
*****
मेरे ख़्वाबों में बसते हो मुक़द्दर में हो न हो चाहे
लकीरों में
तुझे देखूं अमानत मेरी हो न हो चाहे
कश्मक़श में
जीती रख तुझे नज़र के समंदर में
उल्फ़त है
मुझे तुमसे तुझे इक़रार हो न हो चाहे।
*****
ख़ामोश वापसी भाग–3 : उम्मीद का धीमा उजाला
पहली पायलट रन रिपोर्ट सुबह
पाँच बजे आई. रिकार्डो ने कॉफ़ी का घूँट लिया और पीडीएफ़ खोला. पहले पन्ने पर एक
ग्राफ़ था: "जोखिम स्कोर बनाम जनसंख्या घनत्व." वह आगे बढ़ा. नामों की
सूची शुरू हुई.
*****
फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव