प्रातःवंदन..
यह क्षण केवल पूजन का नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आस्था के उदय का भी होता है।
क्षितिज पर जब लालिमा बिखरती है तब उदगमयी अर्घ्य का जल सूर्य की किरणों से आलोकित हो उठता है। चलिए छठ पर्व के समापन के साथ गोपाष्टमी की शुभ दिन के साथ लिंकों पर नजर डाले..
मन पहले भी था पार प्रिये
मन आज भी है चीत्कार प्रिये
तुम कह दो तो संसार तजूं
तुम कह दो तो मझधार चुनूं ..
✨️
न कहना सच है तुम्हें, इन्तज़ार क्या करते।
न सुननी बात हमारी, न दर्द ही सुनना ,
गुहार आप से हम बार बार क्या करते।..
✨️
हड़बां
पंजाबी भाषा दा इक पुट्ठा लफ़्ज़ हड़ब,
पुट्ठा ही तो हुआ अगर यह किसी को परेशान कर दे,
जबड़े की कहें या गाल की हड़्डी उसे कहते हैं हड़ब…
दोनों तरफ़ की जब हो बात तो हड़ब से बन गया हड़बां…
✨️
जब हृदय वाटिका में गूंजे पदचाप तुम्हारे
टहनियां पुष्प की लचक अदाएं दिखलाती
कलियां खिल उठें मंद पवन सुगंधित चले
धमनियों में दौड़ पड़ो अलमस्त सी इठलाती..
✨️
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️