सादर अभिवादन
सोमवार लिए पम्मी अनुरोध किया था
वे व्यस्त हैं
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पाँव हिरणों को मछलियों को नदी का जल दिया
आसमाँ छूना था जिसको बस उसी को पर दिया
बांसुरी और शंख होठों पर सजाकर देखिए
वक़्त ने बेज़ान चीजों को भी मीठा स्वर दिया
सोचा था इस साल
अरमानों की गलेगी दाल ,
जीवन के ग्रह #नक्षत्रों की
हो जायेगी अच्छी चाल
पर चलती रही जिदंगी इस साल भी
पुराने ही #इंतजाम से ।
मौसम का मिज़ाज़
ठंडी हवाएं मन गुनगुनाता है
कहता है यह ढूंढे चलो नए रास्ते
मौसम का अजीब सा फलसबा है
ओस में डुबा सारा ज़माना है
पचपन डिग्री पारे में
रेत के रेगितान पे चलते हुए
मरीचिका न मिले तो क्या चलना मुमकिन होगा
तुम भी न हो और हो सपने देखने पे पाबंदी
ऐसे तो नहीं चलती साँसें
वेदना दलदल है जो
अमिट भूख लिए पैदा होती है।
बहुत पहले यह
कृत्रिम रूप से गढ़ी जाती है,
फिर यह
स्वतः फैलने लगती है।
लेकिन व्यापारी ने इस चेक को कैश कराने की बजाय अपनी अलमारी में रख दिया। अब यह चेक उसकी ताकत बन गया था। उसका आत्मविश्वास बढ़ गया था। किसी भी परिस्थिति से निपटने में यह चेक उसको मदद करेगा, यह बात मनोमस्तिष्क पर बैठ गई थी। व्यापारी ने नई आशा के साथ अपने बिजनेस की शुरुआत की। सकारात्मक और आशा और आत्मविश्वास पूर्ण माहौल उसके बिजनेस की ताकत बन गए। बिजनेस धीरे-धीरे फिर से पटरी पर आने लगा। कर्ज भी निपटने लगा। वह कर्ज से बाहर आ गया और एक बार फिर से धन कमा रहा था।
आज बस
कल मिलिएगा श्वेता जी से
वंदन



