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गुरुवार, 1 जून 2023

3775...एक रोटी पे रूह बिकती है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ.(सुश्री) शरद सिंह जी की रचना से। 

सादर अभिवादन।

गुरुवारीय अंक में पाँच रचनाओं के लिंक्स के साथ आज पुनः हाज़िर हूँ।

आइए पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-

जब

उड़ता है हंसों के साथ

मानसरोवर की पावनता में

शांति की शिलाओं पर

थिर हो आसन  जमाता है

ज्ञान का सूर्य जगमगाता है

निरभ्र निस्सीम आकाश सा उर

बन जाता है!

शायरी | ज़िन्दगी बेलिबास दिखती है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

जिस्म की मंडियों में आलम ये,

एक रोटी पे  रूह बिकती है।

उनके बग़ैर ये क़ायनात नहीं होती--

नब्ज़ हाथों में थामें होता है वो लिए अश्क भरी  निगाहें,
सदीद जीने की तमन्ना हो जब ज़िन्दगी साथ नहीं होती,

मां सुरसरि सब पीड़ा हर दे

क्षमा दया करुणा ममता का

दीप जले निज अंतर्मन में

सुख पाये हरदम जीवन में

मां सुरसरि सब पीड़ा हर दे

बोध सुभग हर उर में भर दे.

नागपुर का जीरो माइल स्टोन स्मारक

 देश के विभिन्न भागों से आने वाले लोगों के लिए नागपुर का जीरो माइल सेंटर, अब आकर्षण का केंद्र बन गया है या यूं कह लीजिए कि पर्यटकों के लिए यहां का जीरो माइल अब उनके लिए एक ''माइल स्टोन'' बन गया है! जिसे देखना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है!

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 


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