सादर अभिवादन
कल के अखबार में था
रु. 2000.00 की कागजी मुद्रा अवकाश ले रही है
उसकी श्वांस मात्र 30 सितम्बर तक शेष है
अपके लिए काम निपटा लें ....
अपके लिए काम निपटा लें ....
साड़ियों की घड़ी बदल लें
दाल-चावल के डिब्बे बदली कर लें
रजाइयों व तकियों के गिलाफ को पलट कर वाशिंग मशीन में डालें
सारे पलंग को गद्दों को धूप दिखाएं...
रद्दी अखबारों को अलग-अलग कर पुनः घड़ी कर
एक बंडल बनाकर सीन(Seen)का लेबल लगा कर रख दें
इतना तो इस सप्ताह करें ..और आने वाले अंकों को देखते रहें
अब आज की रचनाएं देखे ...
केजरीवाल पापसंकट में फंस गए हैं (अब 'धर्मसंकट' शब्द उनके मामले में तो रुचता नहीं )। गुजरात में चुनाव के वक्त उनके द्वारा जनता को कहे गये शब्द 'कॉन्ग्रेस को वोट मत देना। वह पार्टी तो अब ख़त्म हो गई है। आपका वोट बेकार चला जाएगा। हमें वोट देना, गुजरात में हम बहुमत से आ रहे हैं', काँग्रेस अब तक भूली नहीं है। सम्भवतः कांग्रेस ने हर अवसर पर अपना विरोध देख कर ही कर्नाटक-विजय के बाद किये गये शपथ-ग्रहण समारोह में केजरीवाल को नहीं बुलाया था। वैसे केजरीवाल एक अवसरवादी राजनेता हैं। वह क्या कहते हैं, क्या करते हैं, इस बात को संजीदगी से लेने की ज़रुरत नहीं है।
नीम के घर में पाम है साहब
क्या ये मौसम का काम है साहब
जिसकी गीता वही अदालत में
अब तो अपना निज़ाम है साहब
जो भी करना है फैसला करिए
सृष्टि की ध्वनि में राम है साहब
दर-दर की ठोकर से मजबूत होकर
चले राह अपनी सभी आस खोकर
हर छाँव सर से उनकी गिराकर
राहों में काँटे बिछाने चले
उठे वे तो जबरन गिराने चले ।।
पतझड़ों के मध्य, पाले उम्मीदें कई,
चुप थी, कोई शाख,
उन रास्तों पे,
बह रही थी, जिधर इक सदी....
अब जाकर समझ में आया
किस बात ने फूल खिलाया
बाट जोहती थीं जो कलियाँ
डालों पर अब तक गुमसुम
आज हठात उन्हें हुआ क्या
किसने उन पर जादू चलाया
सुर के साथ साज देखिए
कहने का अंदाज देखिए
बातों की तह में जाकर
दिल में छुपे राज देखिए
प्यार में हुआ था पागल
कैसे गिरी है गाज देखिए
आज के लिए बस
सादर





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