सादर अभिवादन
आज अखिल विश्व मातृ-दिवस है
प्रति वर्ष यह मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है
मातृ दिवस माता को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है. एक मां का आँचल अपनी संतान के लिए कभी छोटा नहीं पड़ता। माँ का प्रेम अपनी संतान के लिए इतना गहरा और अटूट होता है कि माँ अपने बच्चे की खुशी के लिए सारी दुनिया से लड़ लेती है। एक मां का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है, एक मां बिना ये दुनियां अधूरी है
भीतर एक गहराई स्थितरता सद्भाव
जब जन्म लेते हैं ,सरलता के भाव
से आत्मा की ओजस्विता बढ़ने लगती है
शाश्वत प्रेम मां का ....
शाश्वत है प्रेम मां का
कोई नहीं है जोड़ उसका
क्या लिखें शब्द नहीं हैं
इतना है, आदर जिसका
सदैव बना रहे
बच्चों के सर हाथ उसका
बस यही है ईश से
मेरी आज प्रार्थना।
-बकुला पारेख
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तुम्हारे स्नेह का आँचल
हमें देती है शक्ति सदा.
हर चोट में हर क्षोभ में
केवल तुम्ही हो पास माँ
लगता हमें हर दर्द की
हरपल तुम्ही हो आस माँ.
छोटी बड़ी गलती हुई हो
या कोई अपराध सा
तुमने किया हरदम क्षमा
रात-भर जागता हूँ,
चिंताएं उमड़ती-घुमड़ती रहती हैं,
दूर से देख लेती हैं वे
पास आती नींद को,
घुसने नहीं देतीं अंदर,
रोक लेती हैं दहलीज़ पर.
मन चाहे कितनी भी
मनमानी करे
जीते हारे अपने विचारों में
यह कोई अच्छी बात नहीं |
समाज में रहने से
उसके अनुकूल चलने से
कुछ तो सीखने को मिलता है |
गाय भी माता
कहलाती है
सूखी हरी
जैसी भी
मिले घास
खा ही
जाती है
दूध की
नदियाँ
बहाती है
तात्कालिक कथन
होती है
क्या एक ही दिन
के लिए...
दूसरे दिन
फीकी साड़ी में
नज़र आती है
मांजते हुए वो
जूठे बरतन ..और
पटक-पटक कर
धोते हुए कपड़े वो ...
या फिर दिखती है
सकेलते हुए गोबर
गौठान में ..वो
यहाँ वे माँ नहीं
जिसका दूध आपने
निचोड़ा अंतिम बूँद तक
माँ थी न वो....
माँ थी न वो....
कहती हूँ मैं कि ... मां
रहती है सुबह से शाम तक
रोज उन्हीं पुराने कपड़ों में
नए कपड़े
किराए से लाए गए थे
शायद...यूँ ही
-मन का उपज
आज के लिए बस
सादर






