सादर अभिवादन
आज नोबेल पुरस्कार विजेता
रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्मदिन है
रबीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के पुत्र के रूप में एक संपन्न बांग्ला परिवार में हुआ था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री टैगोर सहज ही कला के कई स्वरूपों की ओर आकृष्ट हुए जैसे- साहित्य, कविता, नृत्य और संगीत। दुनिया की समकालीन सांस्कृतिक रुझान से वे भली-भाँति अवगत थे। साठ के दशक के उत्तरार्ध में टैगोर की चित्रकला यात्रा शुरू हुई। यह उनके कवित्य सजगता का विस्तार था। हालांकि उन्हें कला की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी उन्होंने एक सशक्त एवं सहज दृश्य शब्दकोश का विकास कर लिया था। श्री टैगोर की इस उपलब्धि के पीछे आधुनिक पाश्चात्य, पुरातन एवं बाल्य कला जैसे दृश्य कला के विभिन्न स्वरूपों की उनकी गहरी समझ थी।
सादर प्रणाम दीदी
बार बार दिन ये आये,
बार बार दिल ये गाये।
तुम जिओ हजारों साल,
ये मेरी है आरज़ू।
अब देखिए रचनाएँ
क्या ऐसा ही कुछ हुआ जो आपका विचार बदल गया? अभी-अभी तो चंद दिन गुजरे.... सरस्वती पूजा को शादी हुई और प्यार दिवस पर ऐसे सौगात की उम्मीद तो न थी। वेणी, बेड़ी नहीं हो सकती...। अगर ऐसा हुआ होता तो रामायण नहीं लिखा गया होता!"
ट्रेन में बैठते ही प्रदीप ने अपनी बंद मुट्ठी खोलकर देखी तो आँखों में नमी और होठों में मुस्कुराहट खिल उठी । साथ बैठे दोस्त राजीव ने उसे देखा तो आश्चर्यचकित होकर पूछा, "क्या हुआ ? तू हँस रहा है या रो रहा है " ?
आज की प्रस्तुति कुछ बड़ी हो गई है
क्षमा करिएगा
सादर
क्षमा करिएगा
सादर
आज के लिए बस
सादर


