सबको यथायोग्य
प्रणामाशीष
शब्द हमारी सासें हैं
चलाते हैं जीवन रुक जाये वरना,
मना रहे हैं जिस तरह
टीवी चैनल हिन्दी दिवस
उससे ही हमने प्रसन्नता पाई,
नहीं मिलेगा हमें यह तय है
फिर भी देंगे
सम्मानीय ब्लॉग लेखको को हार्दिक बधाई,
भावी पीढ़ी पर अगर, दिया नहीं जो ध्यान !
हो जाएगी सत्य यह,.... हिंदी से अनजान !!
हिंदी का समझें बड़ा, खुद को खिदमतगार !
बच्चे जिनके पढ़ रहे,..... अँग्रेजी अखबार !!
अँग्रेजी में लिख रहे, हिन्दी का अनुवाद !
संसद में भरपूर है ,..... ऐसों की तादाद !!
फिल्मो का भी हाथ है,इसमे बडा रमेश !
हिंदी को पहचानते, इसकारण सब देश !
बस ये सोच कर कलम रुक जाती है,
हिंदी किसी कोने में धाराशाही नज़र आती है !
निकलना तो चाहती है वो लेकिन ठहाकों के,
भंवर में कहीं डूब जाती है !!
सोचता हूँ उस तिनके का सहारा मैं बन जाऊ,
मातृ भाषा कहते हैं जिसे उसको माँ का ओहदा दिलाऊं,
बस इसलिए सोचता हूँ मैं कवि बन जाऊं !!
आज भी कई लोग ऐसे हैं, जो हिन्दी भाषा को उचित दर्जा दिलवाने की दिशा में काम कर रहे हैं। वहीं हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दी भाषा के महत्व को बढ़ाने के लिए हिन्दी के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं आप भी इस तरह की कविताओं को सोशल मीडिया साइट्स पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की कोशिश करें ताकि हम सभी के ह्रदय में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना पैदा हो सके।
हिन्दी दिवस

चलिये बहुत ही अंग्रेजी की बात…अंग्रेजी जानने समझने और सीखने में कोई बुराई नही है….वक़्त के साथ परिवर्तन ज़रूरी है…क्योंकि परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है…
पर अपनी भाषा हिन्दी का अलग ही महत्व है…
आप सभी चेतन भगत से भली-भांति परिचित होंगे….उन्होंने अपने किसी एक वक्तव्य में ये कहा था कि… हिन्दी मेरे लिए माँ जैसी है….अंग्रेजी प्रेमिका जैसी…
बहुत से लोग ये मानते होंगे…पर कुछ लोग अपनी इस माँ को ओल्ड एज होम छोड़ कर आ गये हैं….

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फिर मिलेंगे...
विषय...अठासी नम्बर का
खामोश/खामोशी
उदाहरण..
ख़ामोशी से बातें करता था
न जाने क्यों लाचारी है
कि पसीने की बूँद की तरह
टपक ही जाती थी
अंतरमन में उठता द्वंद्व
ललाट पर सलवटें
आँखों में बेलौस बेचैनी
छोड़ ही जाता था
रचनाकारः अनीता सैनी
अंतिम तिथिः 14 सितम्बर 2019(तीन बजे दोपहर तक)
प्रविष्ठि सम्पर्क फार्म द्वारा