सादर अभिवादन
दीवाली उत्सव
आज रूप चौदस
रूप चौदस पर व्रत रखने का भी अपना महत्व है। मान्यता है कि रूप चौदस पर व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण व्यक्ति को सौंदर्य प्रदान करते हैं। रूप चतुदर्शी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर तिल के तेल की मालिश और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण के दर्शन करने चाहिए। ऐसा करने से पापों का नाश होता है और सौंदर्य हासिल होता है।
मान्यतानुसार रूप चौदस की रात घर का सबसे बुजुर्ग पूरे घर में एक दीया जलाकर घुमाता है और फिर उसे घर से बाहर कहीं दूर जाकर रख देता है। इस दीये को यम दीया कहा जाता है। इस दौरान घर के बाकी सदस्य अपने घर में ही रहते हैं।ऐसा माना जाता है कि इस दीये को पूरे घर में घुमाकर बाहर ले जाने से सभी बुरी शक्तियां घर से बाहर चली जाती हैं। इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा और उपासना की जाती है।
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इसके अलावा और भी है
दुनिया एक सराय मात्र है
बोरा-बिस्तर बाँधों अपना,
सोये-सोये उमर बिता दी
कब से देख रहे हो सपना !
बड़े-बड़े पेड़ों का मूल
प्रवाह में अपनी बहाती नदियाँ
किन्तु बेंत का पतला वृक्ष
नहीं बहा ले जाती नदियाँ।
कमजोर समझकर करती उपेक्षा
या उपकार कर देती नदियाँ
कोई खास रहस्य है गहरा
सीख नई समझाती नदियाँ।
वह दर्पण के सामने खड़ी हो गयी और बोली, “बता दर्पण ! मेरी ख़ूबसूरती के बारे में बता'”
दर्पण ने उसे निहारा और बोला, “आपसे भी खूबसूरत लोग हैं इस नगर में"
उसे गहन संताप हुआ और उसने क्रोधित होकर एक पत्थर उठा लिया और बोली, “बता दर्पण !
हम कवि हैं या मसखरे
सब को हँसाते
जनता का दिल लुभाते
कविता याने कि कैसी हो
बहती नदी जैसी हो
हर बशर है कशमकश-ए-दुनिया में
दुख तो कहीं दावतों की मारामारी है।
कोई उलझा ही रहा जीस्त के भंवर में
किसी ने संभल कर ज़िंदगी संवारी है।
(आज दो रचनाएं पत्रिका अनहदकृति से)
अवश्य पढ़िए और सदस्य भी बनिए
अवश्य पढ़िए और सदस्य भी बनिए
आज बस
शुभकामनाएं


