मंगलवारीय अंक में
जब-जब एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है, तो वह केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं होती, बल्कि देश की करोड़ों उन
नन्हें-नन्हें सपनों की जीत होती है
जो अपने पैरों पर खड़े होने और कुछ बड़ा करने का निश्चय करती हैं।
एशियन गेम्स के मंच पर भारतीय महिला एथलीटों ने जिस निडरता और प्रतिबद्धता के साथ अपने हुनर का प्रदर्शन किया है, उसने देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। शूटिंग और एथलेटिक्स से लेकर बॉक्सिंग, हॉकी और तीरंदाजी तक—हर स्पर्धा में बेटियों ने न केवल पदक जीते, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत की खेल क्रांति का नेतृत्व अब वे खुद कर रही हैं।
इन बेटियों का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत नींव की तरह है।
शाबाश, लड़कियों हमें गर्व है तुम पर।





सुंदर चयन
जवाब देंहटाएंस्तरीय रचनाएं
आभार
सादर
शानदार अंक
जवाब देंहटाएंएशियन गेम्स की उपलब्धियां प्रेरक हैं
श्वेता जी, आप की सराहना और कुँवर नारायण की कविताओं को यहाँ जगह देने के लिए धन्यवाद
जवाब देंहटाएं