शनिवारिय भोर और साहित्यिक सृजन की पेशकश कुछ इस प्रकार से ..✍️
फासले चाँदनी स्पर्श बँधी थी हर जानिब ख्वाहिश राग सी I
सन्नाटे हर लहजे साजिश छवि थी कादंबिनी सर्द रात सी ll
सीते सीते दर्द किताब रूह पैबंद सिमटी चटक गांठ सी l
बिखरे आईने एक अपरिचित ताबीर थी अमावस रात सी ll
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मैं चला आऊँगा
बिना साँकल बजाए
आँगन के फूलों को सहलाकर
खिड़की से होकर
बनकर हवा का झोंका,
बैठ जाऊँगा
अपनी व्हील चेयर पर...
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हार मिली कि हार मिला, दोनों है स्वीकार।
एक हार में सीख तो, एक हार श्रृंगार।।
हार जीत कुछ भी नहीं, यह मन का विज्ञान।
हर चीजों का स्वाद है, अलग अलग श्रीमान।।
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न था, न हुआ, न शायद होगा
मानवता के प्रति
तुम्हारी निष्ठा को प्रणाम
बापू तुम्हें प्रणाम !
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कहते दुख में डूबकर, मिला न सच्चा मीत।
स्वारथ मन में है भरा, ढूँढ रहे हैं प्रीत।।
ढूँढ रहे हैं प्रीत, प्रेम की बात न जाने।
छल-छद्मों में डूब, प्रेम को सौदा माने
कहे सुधा सुन मीत, परख जो निज मन लेते,
बनते सच्चे मीत, मित्र हित बात हैं कहते।।
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पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
बेहतरीन अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर
वंदन
सुप्रभात! सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबेहतरीन प्रस्तुति सभी लिंक उम्दा एवं पठनीय।
जवाब देंहटाएंमेरी रचना साझा खलने हेतु तहेदिल से धन्यवाद पम्मी जी
सादर आभार ।