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गुरुवार, 3 सितंबर 2026

4854 .कि वो रात भर जलेबा खाते हैं

 सादर अभिवादन 


कल स्वागत करिएगा माह सितंबर , 
सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन का 
उनका जन्मदिन हम शिक्षक दिवस के रूप में 
मनाते हैं और मनाते रहेंगे

इसी मास के परंपरागत उत्सव भी संग संग चलेंगे...
मसलन ...कृष्ण जन्माष्टमी, हल छठ, पोरा,  
हरतालिका तीज, और गणेश चतुर्थी
लोगों से कहिए उपवास करें पर खा-पी कर

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कुंवारी कन्या:
कुंवारी कन्याओं को किसी के पैर नहीं छूना चाहिए या यदि कोई कुंवारी कन्या आपके पैर छूने का प्रयास करें तो उसे रोक दें अन्यथा आपको पाप लगेगा। छोटी बच्चियों और कन्याओं के तो पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।


बेटियां :
किसी भी पिता को अपनी बेटियों से पैर नहीं छुआना चाहिए। बेटियों को भी चाहिए कि वह पिता के पैर नहीं छुए अन्यथा पिता को पाप लगता है। बेटियों को देवी का रूप माना जाता है इसलिए उनसे चरण नहीं छुआना चाहिए।


बहुएं :
कुछ समाज में बहुएं अपनी सास के पैर छू सकती है, परंतु श्वसुर के नहीं
क्योंकि बहुएं घर की लक्ष्मी होती हैं।






न मिलने की चाहत न रुकने की हसरत,
फिर आने का वादा क्यों कर गए.
हमें लौट कर फिर जीना था वैसे ,
वो जैसे भंवर में फंसा कर गए.






 बचने का कारण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इमारत का मजबूत आरसीसी (RCC) ढांचा, गहरी और ठोस नींव (Foundation) तथा सही दिशा में बना होना इसके टिके रहने का मुख्य कारण माना जा रहा है। 
हालांकि किसी आधिकारिक इंजीनियरिंग रिपोर्ट में इसका सटीक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन इसे मजबूत निर्माण का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

 



भादों महीने में कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज / कजरी रतजगा मनाई जाती है। इसी दिन को बनारस में *जलेबा-कजरी* कहते हैं। काशी में इस दिन की रात को महिलाएं नीमड़ी माता और शिव-पार्वती की पूजा करके पूरी रात कजरी गा कर रतजगा करती हैं। पहले मोहल्लों में ढोलक पर कजरी की तान सुनाई देती थी। इस रात पुरुष और बच्चे व्रत नहीं रहते, तो परंपरा है कि वो रात भर जलेबा (बड़ी जलेबी) खाते हैं





मेरे साथ 
तुमने जुगनू, 
चाँद, तारे, 
बादल, बारिश, 
समंदर और कश्ती...
सबको असहाय दुख 
की ओर धकेल दिया।





लघुकथा/कविता का चौथा अंक
नया विषयः  गणपति उत्सव, और  जगराता, व्रत  
प्रेषण तिथिः 11 सितंबर 26
प्रकाशन तिथिः 13  सितम्बर 26
पिछला अंक देखें    
सादर समर्पित
वंदन




1 टिप्पणी:

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