शीर्षक पंक्ति: आदरणीया रेणु बाला जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
रविवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-
पहला तारा
माँ सिखला रही है
गाँठ खोलना
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जब माँ- बेटी ने
मिल कर
कुछ रातें संग
बिताई होंगी
जी भर गुरबत कर
बेटी से
माँ खुल कर
मुस्काई होगी।
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और तब लगता है
दुनिया में उतरना नहीं,
उतरने का अभिनय करना भर ही
अब शेष रह गया है।
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मेरी चोट का मरहम माँ ही तो है
सबसे प्यारी हमेशा मेरी ही चिंता में घुलने
वाली
माँ देखती हूँ जो
तेरा प्यार मैं भी बड़ी बच्ची
तेरी स्नेह छाँव में ही हर पल जीवन का गुजारु
अभिलाषा मन की,
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सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर
वंदन
आत्मीय आभार आपका
जवाब देंहटाएंमातृ दिवस की बधाई
हमेशा की तरह सुंदर अंक ।
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