पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

मगज.....जहाँ पर विचार जन्म लेते हैं.........अंक छैंछठ

जेब का वजन 
बढ़ाते हुए
अगर दिल पर 
वजन बढे….
तो समझ लेना
कि सौदा 
घाटे का ही है..!
सादर अभिवादन...

आज्ञा मिल गई
यानि कुछ सुना नहीं

ये रही आज की पंसंदीदा रचनाओं का सिरा


आस्था के नाम पर,
बिकने  लगे हैं भ्रम
कथ्य को विस्तार दो ,
यह आसमां है कम .



इंटरनेट की दुनिया में बहुत सी ऐसी साइट मौजूद है जो सच में बड़े काम की होती है लेकिन अक्सर देखा गया है काम की वेबसाइट बहुत ही काम लोगो को मिल पाती है आज मैंने आपके सामने एक ऐसी ही वेबसाइट लेकर आ रहा हु जो आपके बहुत काम आएगी


देखा कुछ ? 
हाँ देखा 
दिन में 
वैसे भी 
मजबूरी में 
खुली रह जाती 
हैं आँखे 
देखना ही पड़ता है 


अभी अभी पता चला कि आज अपनी बीबी की तारीफ करने का दिन है । 'सोशल मीडिया' पर बहुत 'एक्टिव' रहने में यह भी भय रहता है कि जो काम बाकी लोगों ने कर दिया और आपने नहीं किया या बाद में किया तो लगता है 


यादों के झरोखों से
एक याद अब भी आती है
वो बचपन की अठखेलियां
दोस्तों के साथ की सैकड़ों मस्तियां
मुझे अब भी याद आती है


कुछ अनदेखी तस्वीरें
कब्रों की...


चल रही है
चल रही है
चल रही है जिंदगी

ढल रही है
ढल रही है
ढल रही है जिंदगी


आज चाय में ऐसा क्या पड़ गया 
क्यों क्या हुआ ?
गलती से शायद ! अच्छा बन गया


न मैं तुमसे
मांग रहा हूं
भिक्षा अपने जीवन की
न जीवित तुम्हे 
जाने दूंगा आज
यही है सैनिक धर्म मेरा...


अपने मगज के उस हिस्से को 
काट देने का मन होता है
जहाँ पर विचार जन्म लेते हैं  
और फिर होती है
व्यथा की अनवरत परिक्रमा,  


इज़ाज़त मांगता है दिग्विजय

और सुनिए ये गीत




9 टिप्‍पणियां:

  1. धन्यवाद दिग्विजय जी, छायाचित्रकार की भूली कब्रों को यह सम्मान देने के लिए :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर प्रस्तुति । आभार दिग्विजय जी 'उलूक' का सूत्र 'देखा कुछ ?' को स्थान देने के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुप्रभात आदरणीय
    चकित रह जाती हूँ उम्दा लिंकों के बीच खुद के लिखे को पाकर
    आभारी हूँ
    बहुत बहुत धन्यवाद आपका

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर लिंकों का चयन...
    मुझे स्थान दिया आभार आप का....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. मेरी रचना को यहाँ स्थान देने के लिए आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  7. OnlineGatha One Stop Publishing platform in India, Publish online books, ISBN for self publisher, print on demand, online book selling, send abstract today: https://www.onlinegatha.com/

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...