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गुरुवार, 7 मई 2026

4735 ...' जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं। '

 सादर अभिवादन

7 मई ..

आज ही के दिन अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को
अपने आविष्कार का पेटेंट मिला
जिसे उन्होंने टेलीफ़ोन (दूरभाष) का नाम दिया था।


रचनाएं



एमडी ने कुछ कहना चाहा, पर मुख्यमंत्री ने हाथ के इशारे से उसे चुप करा दिया. "मुझे आपके घाटे की बैलेंस शीट में कोई दिलचस्पी नहीं है. मेरी दिलचस्पी अक्टूबर में होने वाले चुनावों में है. अगर ये 350 मजदूर बेरोजगार हुए, तो अंधेरी पूर्व से लेकर आपके इंडस्ट्रियल बेल्ट तक जो आग लगेगी,
उसे बुझाने की ताकत आपमें नहीं है."
मुख्यमंत्री की आवाज़ अब और ठंडी और मारक हो गई. "मैनेजमेंट को तरजीह चाहिए थी, वह मैंने दे दी—सीधे आपको यहाँ बुलाकर. अब फैसला आपका है. या तो यूनियन के साथ बैठकर समझौता कीजिए और दीवाली तक कारखाना चालू रखिए, वरना मैं अभी इसी वक्त इस एप्लिकेशन को रिजेक्ट करने का आदेश दे रहा हूँ. आज ही आपको कम्युनिकेशन मिल जाएगा. और याद रखिए, एक बार रिजेक्ट हुआ तो अगली एप्लिकेशन के लिए पूरे एक साल का इंतजार करना होगा.
एक साल का करोड़ों का मुनाफा छोड़ने के लिए तैयार हैं?"
एमडी के माथे पर पसीना चमकने लगा. उसका सारा अहंकार भाप बनकर उड़ रहा था.




रामकृष्ण ठाकुर की महिमा 
फिर से वापस आए,
अमार सोनार बांग्ला फिर से 
बच्चा बच्चा गाए,
हर बेटी की करे सुरक्षा 
माँ काली विकराल.





अंततः
हर उम्मीद से परे जाकर
उसने खुद का हाथ पकड़ा
और
आहिस्ता-आहिस्ता
सशरीर खड़ा हो गया




राम !  आपका कल्याण हो, 
अतीव प्रसन्न हूँ मैं आप पर 
लक्ष्मण से भी संतुष्ट बहुत, 
मिलने आये मुझे यहाँ पर 

लंबा मार्ग तय करके आये, 
कष्ट और थकावट होगी 
दूर थकावट करने सीता, 
हृदय से उत्सुक जान पड़ती 

हैं अति ही सुकुमारी सीता, 
इससे पहले कष्ट न जाने 
पति प्रेम से प्रेरित होकर, 
वन प्रांतर में कई दुख झेले 




छः बजे के स्थान पर सुबह 5 बजे पाकिस्तान पर हमला कर दिया । क्योंकि उनकी नजर में यही सही समय था, छः बजे तो सूर्योदय हो जाएगा, लोग जाग जायेंगे। सुबह पांच बजे का समय एकदम उपयुक्त था - सब लोग सो रहे थे – वे लोग हक्के बक्के हो गए । और उसने जैसा कहा था, बैसा ही हुआ - उसने पूरे पाकिस्तान को थरथरा दिया । देखते ही देखते भारतीय सेनायें पाकिस्तान से सबसे बड़े शहर लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर रह गईं |
तब तक राजनेता क्या कर रहे थे ? पूरी रात नेहरू और उनकी कैबिनेट विचार विमर्श में उलझी रही - ऐसा करने का क्या नतीजा होगा, बैसा करने से क्या होगा और सुबह 6 बजे तक भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए । तभी उन्होंने रेडियो पर सुना - 'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
यह स्थिति राजनेताओं के लिए असहनीय थी | 


सादर समर्पित
सादर वंदन

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