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बुधवार, 6 मई 2026

4734..कोई न कोई तो बात है..

प्रातःवंदन 
चलिए आज सीधे बुधवारिय प्रस्तुतिकरण पर..✍️


इक ही धुन बजती धड़कन में

इक ही राग बसा कण-कण में,

एक ही मंजिल, एक रस्ता..
✨️

***

लग रही है बेलगाम बोली 
राजपथ असहाय है
आज़ादी पूर्व का एहसास हो रहा
राजपथ बेचैन है
चंद सरमायेदारों  
✨️

“कारखाने की घड़ियों की टिक-टिक मेरे सिर में हथौड़ों की तरह बज रही थी। मेरे पेडू का दर्द किसी तेज़ धार वाले चाकू की तरह उसे भीतर से काटता लग रहा था। मेरे माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं, जबकि मैं काँपते हाथों से सिलाई मशीन पर कपड़े की तह लगा रही थी। मैंने हिम्मत जुटाकर सुपरवाइजर के पास जाने का फैसला किया। ‘स्साब, साहब! बहुत तेज़ दर्द है... क्या मैं आज एक घंटे जल्दी जा..
✨️
 किसी को चलाती है ख़ुशी , किसी को सब्र चलाता है ,किसी को ज़िद चलाती है 

पी कर के कोई ईंधन जैसे सब चल पड़ते हैं 

मुझे मेरा ग़मे-यार चलाता है

3 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति
    सुबह नेटवर्क काम नही कर रहा था
    परेशान भी था
    अल सुबह रवींद्र भाई
    को भी परेशान किया
    फिर भी भी सब ठीक ही रहा
    वंदन

    जवाब देंहटाएं

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