निवेदन।

*हम अपने पाठकों का हर्षित हृदय से सूचित कर रहे हैं कि शनिवार दिनांक 14 जुलाई, रथयात्रा के दिन हमारे ब्लॉग का तीसरा वर्ष पूर्ण हो रहा है, साथ ही यह ब्लौग अपने 11 शतक भी पूरे कर रहा है, इस अवसर पर आपसे
आपकी पसंद की एक रचना की गुज़ारिश है, रचना किसी भी विषय पर हो सकती है, जिससे हमारा तीसरी वर्ष यादगार वर्ष बन जाएगा* रचना दिनांक 13 जुलाई 2018 सुबह 10 बजे तक हमे इस ब्लौग के संपर्क प्रारूप द्वारा भेजे।
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बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

208....लेखन जगत में दुखों का पहाड़

अभिवादन भी करूँ
तो कैसे करूँ
गर हो समय ये
अश्रुपूरित श्रद्धांजली अर्पण का
मृत्यु का वरण करने वालों को
चाहिए क्या...
दो गज ज़मीन
दो गज कपड़ा
और दो फूलों की श्रद्धा
पर जीवित व्यक्तियों को
वो सब चाहिए
जिसकी इनको आवश्यकता
अब नहीं है..


नियमित कार्य......


दर्दों में भी हँसता रहा, अविनाश अंत तक 
आखिर ये ज़ज़्बा मस्त भी खलास हो गया !

इक दिन तो मुन्ना भाई,वहां हम भी आएंगे,
अखबार में छपेगा  कि , अवसान हो गया !



"मेरी धरोहर में"..... संकलित..यशोदा
अपनी मर्जी से कहां अपने सफर के हम हैं,
रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
भारत के मशहूर हिंदी – उर्दू कवि मुक्तिदा हसन ‘निदा फाजली’ नहीं रहे. 12 अक्टूबर, 1938 को जन्मे ये कविराज  8 फरवरी, 2016 को खुदा को प्यारे हो गये. वे 77 साल के थे. हमने उनकी अनेक गज़ल जगजीत सिंघ द्वारा सुनी है, आज जगजीत जी की जन्मतिथि अब निदा जी की पुण्यतिथि बन गई है.





आँखमिचौली खेलता, 
दिनकर दिन भर साथ
परछाईं भी शाम को, 
चली छुड़ा कर हाथ !


मेरी धारणा बन गई है 
मन में बस गई है
सपने में जब कोई 
अपना आता है 
उसका कोई 
संकेत देना कुछ कहना 


लिखती हूँ मिटाती हूँ
जाने क्यों
कविता नहीं बुन पाती हूँ 
कभी दोहे की तलाश मे
अटक जाती हूँ 
कभी शब्द टंग जातें है  दिल के 
तारों पर


आज मन नहीं है
अधिक पढ़ने - लिखने का
बेखयाली मे सूचना देते समय
दिन व दिनांक का खयाल ही न रहा
क्षमा अभिलाषी
आज्ञा दें दिग्विजय को
चलते-चलते एक गीत निदा जी की याद में




9 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    उत्तम रचनाएँ
    लेखन जगत के दोनों मूर्धन्य
    साहित्यकारों को
    श्रद्धासुमन अर्पित करती हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात
    दोनों को विनम्र श्रद्धांजलि

    उत्तर देंहटाएं
  3. जाने वालों को भला कब कोई रोक पाया है
    पीछे छूट जाने वालों पर गहन दुःख का साया है !
    विनम्र श्रद्धांजलि !
    आज के सूत्रों के चयन में मेरी प्रस्तुति 'परास्त रवि' को सम्मिलित करने के लिये आभार !

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हमने दो नगीने खो दिए..
      दो सूर्य अस्त हो गए दीदी

      हटाएं
  4. मेरी ओर से भी...
    दोनों रचनाकारों को विनम्र श्रद्धांजलि

    उत्तर देंहटाएं
  5. अविनाश वाचस्पति जी के साथ ही निदा फाजली जी को विनम्र श्रद्धांजलि !

    उत्तर देंहटाएं

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