निवेदन।


फ़ॉलोअर

बुधवार, 1 जुलाई 2026

4790..धूप का लिबास

।।प्रातःवंदन। ।

रात की अब तह बना दो, विगत को चादर उढ़ा दो,

प्रात की गाओ प्रभाती, उदित रवि को जल चढ़ा दो।

अब उठो कुण्ठा बुहारो !


~ डॉ मृदुल कीर्ति

चलिये चंद वैचारिक,अलंकृत शब्दों से रूबरू हो, अब नज़र डालते हैं लिंको पर..✍️



चलन दुनिया का


दुनिया का चलन

लगे सीखने सबक

बहुत नादान थे हम

समझ न पाये सबब।


छल प्रपंच से भरी..

✨️

दिल में छुपा है इश्क़ जो कैसे बताओगे ...

तुम धूप का लिबास पहन कर जो आओगे.

मुमकिन है तीरग़ी से कभी मिल न पाओगे.


कश-कश के साथ तुमको भी पी लूँगा सोच लो,

हमको जो एक बार भी सिगरेट पिलाओगे...

✨️

कर दो दिल को आज़ाद


एहसान मानेंगे जनम सात .



तुम आओ न मेरे दिल को याद


एहसान मानेंगे जनम सात ..

✨️

मानसिक रूप से रुग्ण आज की पीढ़ी हमें सोचने के लिए विवश करती है कि हमारा समाज कहाँ जा रहा है, हमारे बच्चे किस तरह से विकृत मानसिकता के शिकार हो रहे हैं और वे कौन से कारक और कारण हैं

✨️

रे मन !

मानसून का जोर,


मूसलाधार बारिश,


आंधी और तूफान बहुत हैं,..

✨️

इति शम।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

1 टिप्पणी:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...