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शनिवार, 2 मई 2026

4730..आये हो, तो जाओगे। फिर सोचते हो क्या?

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय विश्वमोहन  जी की रचना से। 

सादर अभिवादन.

शनिवारीय प्रस्तुति में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

आये हो, तो जाओगे।

न रहा अपवाद कोई,

द्युलोक, अंतरिक्ष, पृथ्वी।

समय चक्र सब नाचते,

ग्रह गोचर और रवि।

*****

भक्त वत्सल भगवान

नख पर गिरि गोवर्धन उठा लिया ।

नख से ही हिरण्यकशिपु को तारा ।

ना नर, ना मानव, नृसिंह रुप धरा ।

*****

जिंजर की अदा ..

ना ताज चाहिए उसको, ना कोई बड़ी फरमाइश,

बस थोड़ा प्यार मिल जाएयही उसकी हुकूमत है।

घर के हर कोने में उसकी मासूम चाल बसती,

जिंजर नहीं, वो दिल की धड़कन, मेरी राहत है।

*****

द्वारका -सोमनाथ

देखा सामने तीन शेर अलसाए से पड़े थे।बस को देखकर भी कोई हरकत नहीं की उन्होंने,शायद वह भी जान गए थे कि इंसान उन्हें देखने आता है और खुश होता है,शायद उन्हें भी इंसान पर तरस आ रहा होगा इसलिए वे वैसे ही लेटे रहे ।थोड़ी देर बाद बस चल पड़ी, खिड़की से देखा तो शेर उठ गए थे।सोच रहे होंगे....चलो पीछा छूटा....आगे चलकर थोड़ी ही दूर पर चीते दिखाई दिए....वो भी छाया में लेटे हुए थे,शायद उन्हें भी आदत थी कि इंसान उन्हें देखने आता है इसलिए उनका स्वभाव भी ऐसा बन गया था कि कोई प्रतिक्रिया नहीं करते।बस में लोग वीडियो बना रहे थे और खुश हो रहे थे। करीब दो घंटे में हमने जो भी देखा वो बस यही था।हिरण भी दिख गए थे।नीलगाय भी थी।यह गिर राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा था ।गिर राष्ट्रीय उद्यान बहुत बड़ा है। देवलिया पार्क को बाड़ लगाकर बनाया गया है जिससे पर्यटक कम समय में भी गिर राष्ट्रीय उद्यान का आनंद उठा सकें ।

*****

जेठ की दुपहरी

 अग्नि लपटें

लप-लप झपटे

तन जलाए।

हो गया जीना

बह रहा पसीना

जी घबराए।

बंद चलना

घूमना औ फिरना

किसे बताएँ।

 *****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 


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