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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

4642....लौट आना गौरैया का

मंगलवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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बदलते मौसम का मिज़ाज आपने महसूस किया क्या
फूलों की खुशबू से भीगी हवाओं का संदेश लेकर उड़ती तितलियों की अठखेलियाँ ,गुनगुनाती धूप की छुअन से पर इतराता मन कहता है-
नभ के गेसुओं पर विरह का इतिहास लिखना,
'पी'तुम्हें महसूस कर अनछुए एहसास लिखना।
शरद के झरते बदन से शीत की चुनरी उतारूँ,
कोहरे पर रंग छिड़कूँ अब मुझे मधुमास लिखना।

मौसम से बातें करते हुए यह कविता अंतस तक भीगा गयी इसे पढ़ते कबीर की लिखी  पंक्तियाँ स्मरण हो आई..

आठ पहर चौसंठ घड़ी, लगी रहे अनुराग।
हिरदै पलक न बीसरें, तब सांचा बैराग।।
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आज की रचनाऍं-



अगले ही पल
दोनों आदमी
मोहरों को डिब्बे में भरने लगे
राजा-रानी के साथ
 सभी जानवर पहले की तरह
कठुआए, एक-दूसरे से चिपककर 
गहरी नींद सो गये।



 

इसलिए जब सुना आज चहचहाना,
लगा लौट आया दोबारा कोई अपना ।
वो अपना जिसका होना ही बहुत था ।
गर्दन घुमा चतुर्दिक देखना संवाद था ।
क्यारी में, गमले पर, तारों पर झूलना,
छज्जे से उङ कर खिङकी पर आना,


एक बार हमारे घर मेहमान आए जो मेरे लिए सुंदर सी गुड़िया लाए ...मैं बहुत खुश हुई । उन्होनें कहा देखो तुम -सी ही है न गुड़िया ..खेलोगी न इससे ,देखो इसे जैसे चाहो घुमा सकती हो ,नचा सकती हो ..चाबी की गुड़िया है ये तुम्हारे इशारों पर नाचेगी .......।



आयुष ने एक गहरी सांस ली. खुद को समझाने के लिए, विशाल से कहने लगा, "यार, इतना मत सोच. यह तो... कोचिंग का अपना इंटरनल टेस्ट है. असली मुकाबला तो आईआईटी एंट्रेंस है न? उसी से हमें फर्क पड़ना चाहिए."

विशाल ने उसकी ओर देखा. उसकी आँखों में थकान और एक कड़वी हँसी थी. "इंटरनल टेस्ट? यहीं से तो 'असली' की तैयारी होती है, आयुष. यहाँ नीचे गए तो वहाँ का सपना तक दिखना बंद हो जाता है."



हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, 
जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं 
और कोई निर्णय नहीं ले पाते। 
तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व 
व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। 
अन्ततः यश, अपयश, हार, जीत, जीवन, मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है। 


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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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2 टिप्‍पणियां:

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