नमस्कार
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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रविवार, 25 अगस्त 2024
4227 ...ताज्जुब की बात तुझ पर मैने कभी कुछ नहीं लिखा
शनिवार, 24 अगस्त 2024
4226 ..कभी न भूलना यह क्षमा तुम्हें एक घायल क्षत्राणी से मिली है
नमस्कार
शुक्रवार, 23 अगस्त 2024
4225....किसी निर्जन द्वीप पर
कभी कभी वे अँग्रेजी के शब्द ' एंकर' सरीखे भी थे
मगर जीवन के सभी तूफानों में
वे बंधे रह गए अपनी जगह
जीवन द्वारा जब भी किसी निर्जन द्वीप पर
अकेला पटका गया मैं
तब याद आई पिता की अँग्रेजी वाली भूमिका
जिसे याद कर हिंदी में लिखी मैंने कविता।
पुरस्कार, सम्मान लेने के लिए स्वयं प्रबंध करना होता है। “ - समझाने की गरज से कवि उत्थानक बोले - “ जैसे आपको अखिल भारतीय कवि शिरोमणि का पुरस्कार लेना हो तो सारी व्यवस्था हमारी होगी। “
हतप्रभ आहत सुन रहे थे।
“ आपको अंगवस्त्रम के साथ एक लाख का चेक भेंट किया जाएगा, जो वस्तुतः आपका ही होगा। “ - ठठाकर हँसते हुए उत्थानक बोले - “ वह बाद में आप हमें वापस देंगे। व्यवस्था का सारा खर्च और मेरा कमीशन उसी में से तो होगा। “
गुरुवार, 22 अगस्त 2024
4225...भर भर के जल लाये बादल...
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया सुधा देवराणी जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
‘मौन की आवाज़’ कोरोना पर मेरी कविताओं का तीसरा संकलन है. पहला संकलन ‘जमी हुई ख़ामोशी’ और दूसरा ‘पत्तों पर अटकी बूँदें’ के नाम से प्रकाशित हो चुका है. आशा है कि इन दो संकलनों की तरह यह संकलन भी आपको अच्छा लगेगा. इसे 49 रुपए में ख़रीदा जा सकता है।
घिरी घटा गहराये बादल,
भर भर के जल लाये बादल,
तीव्र ताप से तपी धरा पर,
मधुर सुधा बरसाये बादल।
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मीठे में
कविता- जिक्रे यार चले
'ये जिस गुलमोहर के नीचे हम बैठे हैं न, उसके जन्मदिन पर मैंने उसे तोहफे में दिया था और हम दोनों ने इसे यहाँ रोपा था। मैं जानती हूँ वह भी कभी इस शहर में आता होगा तो कुछ पल इसके नीचे जरूर बैठता होगा...'अब कहो कि स्मृतियाँ सांस नहीं लेतीं...
प्रिय पल्लवी, ये लिखते मेरे
रोएँ खड़े हैं और आँखें नम हैं कि तुमने ये सुंदर किस्से हमें दिये। आओ न गले लग
जाते हैं, चाय तो श्रुति
ही बनाएगी...है न?
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बुधवार, 21 अगस्त 2024
4224..आह्वान है..

मंगलवार, 20 अगस्त 2024
4223....साइकिल चलाने वाली लड़कियाँ
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
मानती हूँ मैं,
असंतुलन सृष्टि का
शाश्वत सत्य है,
सुख-दुख,रात-दिन,
जीवन-मृत्यु की तरह ही
कुछ भी संतुलित नहीं
परंतु विषमता की मात्राओं को
मैं समझना चाहती हूँ,
क्यों नकारात्मक वृत्तियाँ
सकारात्मकता पर
हावी रहती हैं?
क्यूँ सद्गुणों का तराजू
चंद मजबूरियों के सिक्कों के
भार से झुक जाता है?
सोचती हूँ,
बदलाव तो प्रकृति का
शाश्वत नियम है,
अगर वृत्तियों और प्रवृत्तियों
की मात्राओं के माप में
अच्छाई का प्रतिशत
बुराई से ज्यादा हो जाये
तो इस बदले असंतुलन से
सृष्टि का क्या बिगड़ जायेगा?
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जला चुके साल-दर-साल, बारम्बार, मुहल्ले-मैदानों में, पुतलों को रावण के, था वो व्यभिचारी।
पर है अब, बारी-बारी से, निर्मम बलात्कारियों व नृशंस हत्यारों को, जबरन ज़िंदा जलाने की बारी।
वर्ना, होंगी आज नहीं तो कल, सुर्ख़ियों में ख़बरों की, माँ, बहन, बेटी या बीवी, हमारी या तुम्हारी।
चीर हरण के रक्षक जब खुद ही चीर उड़ाते हैं
ऐसे ही किसी देवी का शायद त्यौहार नहीं होगा
बेटी! तुम खुद ही शस्त्र संभालो,
इस कलयुग मे कृष्ण का अवतार नहीं होगा
इस कलयुग मे कृष्ण का अवतार नहीं होगा ||
जब वे पैडल मारते हुए निकलती हैं,
बहुत बहादुर लगती हैं,
जब दोनों हाथों से हैंडल थामती हैं,
तो लगता है, यक़ीन है उन्हें ख़ुद पर.
सीट पर बैठी लड़कियाँ जानती हैं
हर हाल में संतुलन बनाए रखना,
छोटे-मोटे पत्थरों की परवाह नहीं करतीं
साइकिल चलानेवाली लड़कियाँ।
सोमवार, 19 अगस्त 2024
4222 ...रिश्तों का प्यारा बंधन
नमस्कार
जन्मदिन का उपहार
सुभाष (मेरे पति) ने सुबह ही कहा -
"आज कुछ बनाना नहीं। लंच के लिए हम बाहर चलेंगे।
प्राप्ति श्रोत













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