।।प्रातः वंदन।।
बह रही आनन्दधारा भुवन में,
रात-दिन अमृत छलकता गगन में।
दान करते रवि-शशि भर अंजुरी,
ज्योति जलती नित्य जीवन-किरण में ।।
क्यों भला फिर सिमट अपने आप में
बंद यों बैठे किसी परिताप में ।
क्षुद्र दुःख सब तुच्छ, बंदी क्यों बनें,
प्रेम में ही हों हृदय अपने सने ।।
रवीन्द्रनाथ टैगोर..✍
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आज के लिंकों में सम्मिलित ब्लॉग के नाम है..
कलम जो कभी थकती नही.......
सच की स्याही में डूब कर
तख्त ताजों से निडर होकर
शब्द बेबाक बयां करती है
कलम अन्याय के विरुद्ध होती है!!
कलम जो कभी थकती नही.........!!
कलम सच पर पैनी नजऱ रखती है
कलम गुणगान करती है
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स्वार्थ के इस दौर में जब,
अविश्वास और संदेह के भाव,
घुट्टी में पिलाए जा रहे हैं....
तुम संप्रेषित कर रहे हो,
निष्पाप भावनाएँ, कोमल संवेदनाएँ...
छूत का ये रोग क्यों फैला रहे हो ?
दोषी हो तुम !
हर दिल में बस एक ही दुआ
वर्षा ऋतु आए गर्मी मिटाएं
घनघोर घटाएँ ठंडी हवाएँ
झूमकर बरसे काली घटाएँ
तपन मिटे जीवन हँसे
प्यास बुझे धरती खिले..
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क्यों हर बात हर ख़ुशी पर गरबा के लिए तैयार रहते हैं
(नहीं सोचते तो कभी कभी सोच लेना चाहिए , सोचने से दिमाग तेज होता हैं ) |
तो आज इसके पीछे की वजह हम बताते हैं |
(नहीं सोचते तो कभी कभी सोच लेना चाहिए , सोचने से दिमाग तेज होता हैं ) |
तो आज इसके पीछे की वजह हम बताते हैं |
त्रिपुरासुर का वध करके जब शिव आये तो उनके क्रोध को शांत करने के लिए
पार्वती ने पहली बार लास्य नृत्य उनके सामने किया..
पार्वती ने पहली बार लास्य नृत्य उनके सामने किया..
हमारी दुआयें असर ला रही हैं
किसी राह भूले को घर ला रही हैं
हवायें मेहरबान होने लगी हैं
मुहब्बत से भीगी ख़बर ला रही हैं
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'…✍




