निवेदन।


फ़ॉलोअर

3517 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
3517 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

3517...हिन्दी कहती- तितली-सी उड़ूँगी नहीं हारूँगी...

शीर्षक पंक्ति: डॉ. जेन्नी शबनम जी की रचना से। 

सादर अभिवादन।

गुरुवारीय अंक लेकर हाज़िर हूँ। प्रस्तुत हैं सद्य प्रकाशित पाँच रचनाओं के लिंक्स व अंश-

749. हमारी मातृभाषा (6 हाइकु)

 
5.

अपनों द्वारा

होती अपमानित

हिन्दी शापित।

 6.

हिन्दी कहती-

तितली-सी उड़ूँगी

नहीं हारूँगी।

 'हिन्दी दिवस' (लघु कविता)

हिन्दी भाषा की जो आन-बान है,

किसी और की कब हो सकती है!

एक बेटी की इच्छा

तलाक के काग़ज़ शायद उड़ जाएं खिड़की से बाहर,

जैसे फेंक दी जाती हैं अनचाही चीजें कबाड़ के साथ,

मां और पिता फ़िर साथ बैठ सपनों में खो जाएं

और मैं

उनके प्रेम की साक्षी बन स्थिर हो जाऊँ उन दीवारों की जगह।।

हिंदी माँगे अधिकार सुनो !

हूँ हिंदी सिद्धा स्वयं सकल

हर भाषा भाषी में व्यापूँ 

अंतर्मन घट-घट में उतरूँ

मग-मग,डग-डग धरती नापूँ ॥

कम्प्यूटर होविज्ञान जगत

नतमस्तक बारम्बार सुनो 

हिन्दी (कृपाण घनाक्षरी)

हम हिन्दी में बोलते।

बोली में मिश्री घोलते।

हर भाषा से तोलते।

हिन्दी को अपनाइए।

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव  


रविवार, 11 सितंबर 2022

3513 आज से सब पितर आएंगे, फल्गु के तट पर

 सादर अभिवादन

पितृ-पक्ष का प्रथम दिवस
महत्वपूर्ण पक्ष वर्ष का
दिवंगत माता-पिता का कहा जाता है ...

माना कि मैं तेरे साथ नहीं, तेरे पास नही,
तुझ से मगर दूर भी नहीं, जुदा भी नहीं,

तेरे वजूद में रचा बसा हूँ, कस्तूरी की तरह,
तेरी नस नस में समाया हूँ, लहू की तरह,

अब रचनाएं देखें



पिण्डदान करते हुये
पापा आपके साथ
दादा का परदादा का
स्मरण तो किया ही
माँ के साथ
नानी और परनानी को
स्मरण करने पे
श्रद्धा के साथ गर्व भी हुआ
ये 'गया' धाम निश्चित ही
पूर्वजों के अतृप्त मन को
तृप्त करता होगा !!






अब नहीं थकती हूँ मैं
क्योंकि
थकान को मै
इसलिए अब महसूस
नहीं कर सकती हूँ




उम्र कुछ ढलने लगी है
रफ्तार कदमों की थमने लगी है
उठ बैठ अब होती नहीं
चपलता अब सोहती नहीं


पितृपक्ष ... अर्चना कुमारी


अब भी इंतजार में हैं
कि प्यास का हल लेकर आएगा कोई
आस का फल लेकर आएगा कोई
विश्वास की ऊँगलियाँ थरथरा रही हैं
आँख इंतजार की पथरा रही है
कान मोहब्बत के घबरा रहे हैं
-कविता कोश से


आज बस
सादर
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...