शीर्षक पंक्ति: आदरणीया आशा लता सक्सेना जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक में मेरी पसंदीदा पाँच रचनाएँ आपकी नज़र-
ऊँची उड़ान है ध्येय मेरा
उसमें सफल
रहूँ
हार का मुँह न देखूँ
बस रहा यही
अरमान मेरा।
बूंद
तृप्त कर
देती है अतृप्त मन को
सींच देती है
अपनत्व का
बगीचा
बूंद
तुम्हारे
कारण ही
धरती पर
जिंदा है हरियाली
जिंदा है जीवन---
स्मृति इक जंजीर है
विकल्प इक आवरण
रिक्त हुआ जब घट बासी जल
से
तब भर देता है अस्तित्व
अमी प्रेम का सुमधुर
एक घूँट पर्याप्त है
वह मुस्कुराते हुए मुझे धन्यवाद देकर चले गए।
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फिर मिलेंगे
रवीन्द्र सिंह यादव