सादर नमस्कार
पम्मी बहन का संदेश आया
प्रस्तुति नहीं बना पाऊँगी
सही व सटीक संदेश
बहन रिक्वहरी पीरियड में है

अविरत गतिमय ज्योतिपुंज हूँ
निर्बाधित संगीत अनोखा,
सहज प्रेम की निर्मल धारा
पावन परिमल पुष्प सरीखा !
चट्टानों सा अडिग धैर्य हूँ
कल-कल मर्मर ध्वनि अति कोमल,
मुक्त हास्य नव शिशु अधरों का
श्रद्धा परम अटूट निराली !

गालियां देता मन
दहशत भरा माहौल
चुप्पियां दरवाजा
बंद कर रहीं
खिड़कियाँ रहीं खोल
थर्मामीटर नाप रहा
शहर का बुखार
सिसकियां लगा रहीं
जिंदा रहने की गुहार
आंकड़ों के खेल में
आदमी के जिस्म का
क्या मोल

प्रकृति के पोर-पोर को,
दूह-दूह जो खायी है।
प्रतिक्रिया प्रतिशोध जनित,
यह कुदरत की कारवाई है।
काली करतूतों का जहर,
वायुमंडल में छितराया है।
ओजोन छिद्र के गह-गह में,
जीवाणु-गुच्छ भर आया है।

चिराग दिल में उम्मीद का तेल भर देती
ताकि रौशन रहे दर तेरी यादों का
इस आस में कि कभी इस गली
भूले से आ जाए वक्त चलकर
दोहराने हर बात शबनमी शामों की
और वापस न लौट जाए कहीं
दर पे अँधेरा देखकर।
......
किसी न किसी को तो हिम्मत करना ही होगा
वरना सारे अंकों में स्थगित अंक का पैबंद लगता चला जाएगा
पाँच से चार में है आज
कल शायद फिर पाँच हो जाए
सादर
किसी न किसी को तो हिम्मत करना ही होगा
वरना सारे अंकों में स्थगित अंक का पैबंद लगता चला जाएगा
पाँच से चार में है आज
कल शायद फिर पाँच हो जाए
सादर