सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक
में
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आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-
अंधविश्वास पच्चीसी - भाग 1... प्रोफ़ेसर गोपेश मोहन जैसवाल
अशिक्षित स्त्रियों में अंधविश्वास का बहुत अधिक प्रसार होता है.
जादू, काला जादू, गण्डे, ताबीज़, टोटका, नज़र लगना, जिन्न, भूत, चुड़ैल, मन्नत और न जाने किस-किस में ये विश्वास करती हैं.
स्त्री-समाज में तो अंधविश्वासों का बोलबाला कुछ ज़्यादा ही था.
अंधविश्वास के उन्मूलन के लिए स्त्री-शिक्षा का प्रसार अत्यन्त आवश्यक है.
अग्नि परीक्षा...आशा लता सक्सेना
सतयुग में सीता ने दी थी अग्निपरीक्षा
अपनी पवित्रता के प्रमाण के लिए
भूल हुई थी उनसे लक्ष्मण रेखा पार कर
यदि कहना माना होता इतने कष्ट न सहना होते
राम रावण युद्ध न होता |
एकदम मौन स्तब्ध अपने स्थान पर
रत्न की तरह जड़े से दिखाई देते हैं,
जब पास से आती पत्तों की
धीमी सी सरसराहट भी
अनायास ही बेचैन कर जाती है
मैं जान जाती हूँ
नींद तेरी आँखों से कोसों दूर है !
अनदेखी करना
भले ही …
किसी की नजरों में
सभ्यता का दायरा होगा
छलना को तो यह...
अपना कौशल ही लगता है
रिश्ते यहाँ अक़्सर...सुबोध सिन्हा
बनते हैं रिश्ते
ऐसे में या ..
होता है फिर
कुलीन-शालीन
व्यापार कोई ?
बसंत में पल्लवित पौधे को
बुहार अग्नि पुष्प खिलाए
नदियों को तितर-बितर कर
साज़िश से समंदर को सुखाया।
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आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरुवार।
रवीन्द्र सिंह यादव
