सादर अभिवादन।
गत 6 अगस्त की रात्रि देश की पूर्व विदेश मंत्री, संवेदनशील महिला, सक्षम-कुशल वक्ता और स्वनामधन्य राजनेत्री सुषमा स्वराज जी का
आकस्मिक निधन हो गया। इस ख़बर से
देश दुःख में डूब गया।
आकस्मिक निधन हो गया। इस ख़बर से
देश दुःख में डूब गया।
'पाँच लिंकों का आनन्द' की ओर से
उन्हें भावभीनी श्रद्धाँजलि!
उन्हें भावभीनी श्रद्धाँजलि!
आइये अब आपको आज की रचनाओं की ओर ले चलें-

"बात-चीत
के
क्रम
में,
अपना
शहर
तो
रास
नहीं
आया...उस
समाज
के
लिए
कभी
कुछ
किया
नहीं...जो
अपनों
के
बीच
नहीं
रहना
चाहता,
वह
अजनबियों
के
बीच
रहेगा..उनके
मुख
से
सुन
और
भाषा-बोली,
खान-पान,
चरित्र-
व्यक्तित्व
से
डरे-सहमे
के
बगल
में
रहने
का
इरादा
बदल
दिया।"
हवाई
जहाज
के
उड़ने
की
घोषणा
हो
रही
थी
नेता
जी
के
घर
वापसी
के
लिए
और
सामने
न्यूज
चैनल
पर
जन-जन
प्रिय
प्रत्येक
दिलवासी
नेत्री
के
मोक्ष
की
खबरें
आ
रही थीं..

अब दो-दो कानून का, नहीं
चलेगा दौर।
दशकों से कशमीर है, भारत
का शिरमौर।।
अब जम्मू-कश्मीर की, हुई
असम्बली भंग।
बदले तेवर देखकर, पाक रह
गया दंग।।
पक्की सड़कों के बीच
कुछ कच्चे रास्ते हैं,
मेरे गाँव में अब
वे गुमसुम से रहते हैं।

उस मुक़ाम पर हैं, यहाँ जीना पड़े यादों के सहारे
हम इसे ख़ुशी कहते हैं, लोग इसे ग़म कहते हैं।
क्या औक़ात है आदमी की ख़ुदा से टकराने की
जितने भी किए सितम वक़्त ने, उनको कम कहते हैं।
झूठों ने पाये
जीवन में मुकाम नये
सत्य लगता कडवा भले
लेकिन फिर भी है न्यारा
जो बोलोगे झूठ तुम
वाह वाही भी लूट लोगे
पकड़ा गया झूठ अगर तब
करेगा कौन एतबार तुम पर
हम-क़दम
का
नया
विषय
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
रवीन्द्र सिंह यादव