सादर अभिवादन
सखी श्वेता प्रवास पर हैंं..
देश व्यथित है.... हमेशा की तरह
किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाए हैं ..
लोग सलाह पर सलाह दिए जा रहे हैं..
इस विषय पर यही कहा जा सकता है
जो भी होगा अच्छा ही होगा...
हम सहनशील भारत के नागरिक हैं..
चलिए चलें... देखें आज का अंक......
डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं

बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए
चोर को पकड़ने के लिए चोर लगाना चाहिए
कायर भेड़िए की खाल में मिलते हैं
डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं
डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं

बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए
चोर को पकड़ने के लिए चोर लगाना चाहिए
कायर भेड़िए की खाल में मिलते हैं
डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं
था भरोसा
एकदिन प्यार हो जायेगां तुम्हें
मेरे प्यार पर
और हम साथ-साथ चलेंगें
लेकिन नही
हुआ
मेरा सोचा
एकदिन प्यार हो जायेगां तुम्हें
मेरे प्यार पर
और हम साथ-साथ चलेंगें
लेकिन नही
हुआ
मेरा सोचा

देखूँगा
आसमान में चमकते सितारे,
झील में उतरा चाँद,
महसूस करूंगा
आवाज़ों का चुप होना,
कहीं-कहीं झींगुरों का गीत
या दूर कहीं बजता
मीठा-सा संगीत।
जिंदगी मेरी ...

मुक़ाम यही था मेरा
शहादत साथ निभा गई
कुछ को किया बेनक़ाब
कुछ की अक़्ल ठिकाने आ गई |
"मौन वीणा"

वीणा का सौंदर्य जाग उठा,
साधक का हाथ भी कांप उठा।
वीणा का आत्मीय सौंदर्य प्रकट,
साधक था प्रवीण बड़ा उद्भट।
सुर-लय-ताल स्फुटित हुए,
वीणा-साधक जब एक हुए।
बस इतनी सी ये कहानी है,
इसके बिना जग बेमानी है।
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
आज के लिए बस इतना ही
आज्ञा दें
यशोदा

