सादर अभिवादन।
ये
सर्दी
सुहानी
सिहराती
कुहाँसा ओढ़े
बर्फ़बारी छायी
नियति-चक्र न्यारा।
आइये अब आपको आज की पसंदीदा
रचनाओं की ओर ले चलें-
रचनाओं की ओर ले चलें-
"आज का हामिद"......विभा रानी श्रीवास्तव
उसे अपने कोर्स में पढ़ी प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' याद हो आयी। उसे लगा वह गौरव नहीं हमीद है। गौरव अपनी दादी के लिए चिमटा नहीं चश्मा खरीदना चाहता था ताकि दादी अपने कार्य ठीक से कर सकें। कम दिखने की वजह से कभी रोटी जल जाती तो कभी सब्जी में नमक कम या ज्यादा हो जाता। उसके मित्र एक बड़े दूकान में कुछ ख़रीदने के लिए रुके तो वह सामने चश्मे की दूकान पर रुका,"भैया! मेरी दादी को ठीक दिखलाई नहीं देता है उनके लिए एक चश्मा चाहिए।"
दुःख (दुःख पर 10 हाइकु)….डॉ.जैनी शबनम
दुःख अतिथि
जाने की नहीं तिथि
बड़ा बेहया
!
कभी चांदनी दामन में भरता
कभी मुठ्ठी की रेत सा फिसलता
जिंदगी कभी बहुत छोटी लगती
कभी सदियों सी लम्बी हो जाती
मौसम आते हैं....
"चिन्तन"(चोका)….मीना भारद्वाज

अश्रु बिन्दु सा
बन के खारा जल
बिखर जाऊँ
कोमल गालों पर
या बन जाऊँ
किसी सीप का मोती
बनकर दीमक चाट रहे
नींव घरों की,
वही बन गए आस सभी
खेतिहरों की।
चलते-चलते प्रकृति और इंसान के ख़ूबसूरत रिश्ते पर प्रकाश डालती एक शानदार प्रस्तुति पर -
घर में बिन बुलाया मेहमान अलेक्ज़ेन्ड्रियान पैराकीट -सतीश सक्सेना
मैं उन खुशकिस्मत इंसानों में से एक हूँ जो इन जीवों से बात करने का प्रयत्न करता रहा हूँ और इनसे दोस्ती बनाए रखने में सफल हूँ ! आप यकीन करें या न करें प्यार का प्रत्युत्तर देने में यह सब जीव मानवों से बेहद आगे हैं ! इंसानों को सबसे अधिक प्यार करने वाले कुत्तों ( जिन्हें हम जाहिलों ने गाली का दर्जा दिया ),स्मार्ट खरगोश , खूबसूरत गिनी पिग ,के बाद पिछले दिनों अचानक एक अजनबी तोता हमारे घर आ गया जिसकी समझदारी ने हमारी धारणाओं को उड़ाकर रख दिया !
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
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आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
शुक्रवारीय प्रस्तुति- आदरणीया श्वेता सिन्हा जी
रवीन्द्र सिंह यादव
